रायबरेली-लखनऊ रेल खंड पर हरचंदपुर स्टेशन के समीप न्यू फरक्का एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के चलते जहां कुछ ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया तो वहीं कई के रूट बदल दिए गए। इसके चलते बनारस में यात्रियों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। अंतिम समय में लोगों को अपनी यात्रा निरस्त करनी पड़ी या फिर रोडवेज बसों से यात्री अपने गंतव्य को रवाना हुए।
महिलाओं और बुजुर्गों को अचानक पैदा हुए इस संकट से सबसे ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ी। पूछताछ काउंटर पर जानकारी के लिए लोग मशक्कत करते रहे। इस ट्रेन की विभिन्न श्रेणियों में वाराणसी से 40 टिकट आरक्षित कराए गए थे। 39 यात्रियों को वाराणसी से तो वहीं एक यात्री को प्रतापगढ़ से चढ़ना था।
जनरल में कितने यात्री स्टेशन से बैठे इसको लेकर रेलवे प्रशासन के पास कोई आंकड़ा नहीं है। 40 आरक्षित सीटों में से एसी-2 के तीन, एसी-3 के छह व स्लीपर के 31 यात्री सवार हुए। रेल प्रशासन का दावा है कि ये सभी यात्री सुरक्षित हैं।
स्टेशन निदेशक कैंट रेलवे स्टेशन आनंद मोहन ने बताया कि प्रतापगढ़-रायबरेली मार्ग बाधित होने से रूट की कुछ ट्रेनें निरस्त तो कई के रूट बदले गए हैं। वाराणसी से 11 एनडीआरएफ के 50 से ज्यादा जवान भी राहत बचाव कार्य के लिए भेजे गए। उधर, यात्रियों के परिजन हेल्प लाइन नंबर पर पूरे दिन अपनों की कुशलता जानने के लिए परेशान दिखे।
वहीं प्रतापगढ़-रायबरेली रूट बाधित होने के बाद ट्रेनें बदले रेल मार्ग से चलाई जाने लगीं। इसके चलते प्रतापगढ़, रायबरेली के सफर के लिए लोगों को समस्या का सामना करना पड़ा। पूछताछ काउंटर पर भी रूट सामान्य होने की सही जानकारी न मिल पाने की वजह से लोग विकल्प की तलाश में लग गए। ऐसे में सड़क मार्ग की ओर यात्रियों ने रुख किया। रोडवेज बसों से यात्री अपने गंतव्य को रवाना हुए।
उधर, न्यू फरक्का एक्सप्रेस से सफर कर रहा खोजवां निवासी रमेश जायसवाल (33) इस दुर्घटना में घायल हो गया। रमेश जायसवाल ने बताया कि वह रेल इंजन से दूसरी बोगी में सफर कर रहा था। वह किसी काम से लखनऊ जा रहा थ।
रमेश ने बताया कि अचानक जोर की आवाज के साथ तेज झटके लगने शुरू हो गए और वह बेहोश हो गया। वह इंजन से दूसरी, जनरल बोगी में सफर कर रहा था। उसके साथ ही डीआरएम कार्यालय में काम करने वाले गुंजन भी सफर कर रहे थे पर वह बाल-बाल बच गए।