जाको राखे साइयां मार सके न कोय, बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय....वर्षों से चला आ रहा यह दोहा एक बार फिर से वाराणसी में चरितार्थ हो गया। पारिवारिक प्रताड़ना से परेशान एक वृद्धा जान देने के लिए रेल पटरी के बीच लेट गई और उसके ऊपर से ट्रेन गुजर गई। संयोग से उसे एक खरोंच तक नहीं आई। ट्रेन गुजरने के बाद जब लोगों ने वृद्धा को जिंदा देखा तो सभी हैरान रह गए।
आननफानन उसे उठाया और पुलिस चौकी लेकर आए। घटना आशापुर रेलवे क्रॉसिंग के पास की है। वृद्धा ने बताया कि वो बहू और बेटे से काफी परेशान है। रविवार सुबह बेटे ने दुर्व्यवहार किया जिसके बाद उसने जान देने का मन बना लिया। लेकिन मौत भी मेरे नसीब में नहीं है। मैं पटरी पर लेटी लेकिन ट्रेन बिना कुछ किए ही निकल गई। वो बार-बार यही कह रही थी कि मुझे जाने दीजिए और ट्रेन से कट जाने दीजिए। परिवार की परेशानी को बताते हुए वृद्धा रोने लगी, जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए।