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कहा, एक वक्त की ही रोटी बनाओ और सांसे टूट गईं

Sat, 18 Apr 2015 02:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
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तूफान और बारिश से बर्बाद हुई फसल देखने के बाद सदमे से कपसेठी गांव के किसान गोपाल दुबे (50) की गुरुवार की रात मौत हो गई। उन्होंने साहूकार से सूद पर 60 हजार रुपये कर्ज लेकर चार बीघे में गेहूं की खेती की थी। वे गुरुवार को मौसम साफ होने पर शाम को खेत देखने गए थे।
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बारिश से बर्बाद गेहूं के बोझों को देखकर उन्हें गहरा सदमा लगा। कर्ज चुकाने और आठ सदस्यों वाले परिवार के भरण-पोषण की चिंता से परेशान वे घर पहुंचे। फसल बर्बाद होने की बात कहते हुए उन्होंने पत्नी से एक वक्त ही रोटी बनाने की बात कही। इसके कुछ देर बाद रात नौ बजे उनकी सांसों की डोर टूट गई। शुक्रवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया।

चार बीघे की खेती से ही गोपाल दूबे का परिवार चलता था। उनके दो शादीशुदा बेटे सुभाषचंद्र और सुरेशचंद्र प्राइवेट नौकरी करते हैं। दोनों की आय करीब 12 हजार रुपये प्रतिमाह है। बेटी सुषमा की भी शादी हो चुकी है। पत्नी श्याम कुमारी का कहना है कि इस बार पति ने साहूकारों से 60 हजार रुपये कर्ज लेकर खेती की थी। फसल भी अच्छी हुई थी। गेहूं की कटाई के बाद मड़ाई की तैयारी में थे कि सोमवार से बुधवार तक लगातार तीन दिन तक तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से फसल बर्बाद हो गई।
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गुरुवार शाम गोपाल खेत देखने गए तो पानी से फसल में सड़न देख उनको गहरा सदमा लगा। रात साढ़े आठ बजे पत्नी श्याम कुमारी खाना लेकर गईं तो थाली में रोटियां देख उनकी आंखों में आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि फसल बर्बाद हो गई है। अब एक ही वक्त रोटी बनाओ। महज दो रोटी खाकर वे उठ गए। सोने की बात कहकर बिस्तर पर लेटे। थोड़ी देर बाद बत्नी ने देखा तो उनकी मौत हो चुकी थी। उधर, घटना की सूचना पर राजातालाब के तहसीलदार विमल कुमार दुबे मौके पर पहुंचे।

उन्होंने बताया कि मृतक के परिवार वालों को पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार रघुनाथपुर के किसान स्वामीनाथ की मौत मामले में एक माह का राशन, आवास के साथ पारिवारिक योजना का लाभ दिया जाएगा।
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