ललित के गांव में जश्न मनाते ग्रामीण
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कोच परमानंद मिश्र ने बताया कि ललित शुरू से ही खेल के प्रति जुझारू रहा है। वह एक बार जिस चीज को ठान लेता है वह करके ही सांस लेता है और ऐसा ही उसने टोक्यो ओलंपिक में किया। काशी के मोहम्मद शाहिद 1980 में मास्को ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक जिताने वाली टीम के सदस्य थे। इस साल ललित उपाध्याय भारतीय टीम के सदस्य रहे। ओलंपिक 2020 में भारतीय हॉकी टीम में काशी के ललित उपाध्याय की सदस्यता के बाद 41 साल बाद टीम को पदक मिला है। हालांकि इस बीच काशी के दो ओलंपियन हॉकी टीम में सदस्य रह चुके हैं लेकिन पदक नहीं मिला।
1996 में राहुल सिंह के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम में 25 साल बाद ललित को मौका मिला। जिसे भुनाने में ललित ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी । इधर, 41 साल बाद भारतीय टीम के पदक जीतने पर बनारस रेल कारखाना, यूपी कॉलेज, सिगरा स्टेडियम में अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों में काफी उत्साह है।
खिलाड़ी कादिर जमाल, सूरज, सहित कई खिलाड़ियों में काफी खुशी का माहौल है। ललित के साथ कई अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले उनके दोस्त और हॉकी खिलाड़ी हरिकृपाल यादव, लक्ष्मीशंकर, जूनियर खिलाड़ी गौतम ने कहा कि बहुत ज्यादा खुशी मिली है। बरेका कोच सुनील सिंह ने बताया कि इस सफलता से हॉकी को लेकर लोग जागरूक होंगे।
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने पदक जीता तो बरेका की ओर से झांकी निकालने की तैयारी है। जिसमें बरेका की हॉकी टीम और खेल प्रेमी शामिल होंगे। जो जश्न के साथ काशी वासियों को हॉकी के इतिहास के बारे में परिचय कराते हुए खेल के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे। जिला हॉकी संघ भी सिगरा स्टेडियम जश्न मनाने की तैयारी में जुट गया। शाम को सिगरा स्टेडियम में अभ्यास करने वाले खिलाड़ी गाजेबाजे के साथ जीत का जश्न मनाएंगे।
ओलंपिक में पहुंचने के लिए खिलाड़ी को काफी संघर्ष और कई त्याग करने पड़ते हैं। कुछ ऐसा ही काशी के लाल ललित उपाध्याय को भी करना पड़ा। वह बड़े भाई की शादी से महज चार दिन पहले इंडिया कैंप के लिए बंगलूरू चले गए और शादी में शामिल नहीं हो पाए।
कॉमनवेल्थ, एशियन, वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय हॉकी टीम की तरफ से जलवा बिखेरने वाले ललित के इसी जुनून की बदौलत कई बार रेलवे और बैंकों से नौकरी के ऑफर भी आए। लेकिन ओलंपिक का सपना संजोए ललित ने नौकरी करने से इनकार कर दिया था। मां रीता ने बताया कि बेटे के त्याग ने उसे कामयाब बनाया है। अब ओलंपिक में भारती टीम की सफलता में योगदान दिया है।