फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज तक शहर का सही समय नहीं बता सका घंटाघर

विज्ञापन
सिविल लाइंस चौराहे पर बने घंटा घर की बंद घड़िया। - फोटो : AZAMGARH
विज्ञापन
आजमगढ़। नगर पालिका द्वारा लगभग छह वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से घंटाघर का निर्माण कराया गया। इसमें चारों दिशाओं में चार घड़ियां लगाई गईं, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि छह साल बीतने के बाद भी घंटाघर के चारों दिशाओं में लगाई गईं घड़ियां एक समय नहीं बता सकीं।
विज्ञापन

हर शहर में एक घंटाघर होता है जो लोगों को समय का आभास कराता रहता है। अपने जनपद में घंटाघर नहीं था। जिससे पूर्व पालिकाध्यक्ष ने नगर सिविल लाइंस चौराहे पर घंटाघर के निर्माण का निर्णय लिया। नगर पालिका के प्रयास से घंटाघर का निर्माण शुरू हुआ लेकिन कुछ दिन बाद काम ठप हो गया। फिर कई महीने बाद काफी मशक्कत होने पर इसका निर्माण हो सका। इसके चारों मार्गों की तरफ घड़ियां भी लग गईं, लेकिन तब से अब तक छह साल गुजर गए, परंतु यह चारों घड़ियां एक समय नहीं बता सकीं। इसमें से तीन घड़ियां तो लगने के बाद से ही बंद हो गईं। सिर्फ एक घड़ी चल रही है जो सही समय बता रही है। इस प्रकार देखा जाए तो इसकी चारों घड़ियां चार समय प्रदर्शित कर रही हैं। जिससे लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया घंटाघर आज शोपीस बनकर रह गया है। अब लोगों ने इसको प्रचार का अड्ड़ा बनाकर पूरा का पूरा घंटाघर होर्डिंग और पोस्टर से पाट दिया है।
विज्ञापन

घंटाघर की खराब घड़ियों को बनाने के लिए लखनऊ से कारीगर को आना है। उम्मीद है कि एक हफ्ते में कारीगर आएगा और घड़ी की मरम्मत करेगा।
- शुभनाथ प्रसाद, ईओ नगरपालिका परिषद आजमगढ़।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें