भीषण गर्मी (मार्च-जून) में पौधों की प्यास बुझाने के लिए सप्ताह में तीन बार 45 मिनट की विशेष सिंचाई का शेड्यूल तय किया गया है। सिंचाई के लिए यहां पांच बोरवेल स्थापित किए गए हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि भीषण गर्मी (मार्च-जून) के दौरान भी पौधों को सप्ताह में 3 बार उचित नमी मिलती रहे। पांच और बोरवेल लगाए जाएंगे।
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पौधा लगाने के लिए मौसम अनुकूल
मेयर ने कहा कि विशेषज्ञों के मुताबिक मार्च का प्रथम सप्ताह इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सबसे अनुकूल है। इसके पीछे कई वैज्ञानिक और भौगोलिक कारण हैं। मानसून आने से पहले पौधों को रोपित करने से उनकी जड़ों को जमने का पूरा समय मिल जाता है, जिससे उनके जीवित रहने की दर (सरवाइवल रेट) काफी बढ़ जाती है।
मिट्टी का कटाव गंगा तट पर स्थित होने के कारण यहां मिट्टी के कटाव का खतरा रहता है। बरसात से पहले फैली जड़ें मिट्टी को बांधकर कटाव रोकने में सुरक्षा चक्र का काम करेंगी। अप्रैल-मई की भीषण गर्मी शुरू होने से पहले पौधे नए वातावरण में ढल जाते हैं। यहां शीशम और अर्जुन जैसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है, जो नदी किनारे के वातावरण और अस्थायी जलभराव को सहने में सक्षम हैं।
एक नजर में आंकड़े
- आधुनिक सिंचाई : 360 रेन गन स्प्रिंकलर सिस्टम
- सिंचाई नेटवर्क 10827 मीटर पाइपलाइन और 10 बोरवेल
- चार किलोमीटर पाथवे
- कुल अनुमानित आय : 19.80 करोड़ रुपये (5 वर्षों में)
छायादार और वन प्रजातियां शीशम : 35,171
- सागौन: 14,371
- अर्जुन: 13,671
- सप्तपर्णी: 13,071
- बांस: 12,371
- पीपल: 11,421
- महुआ : 10,771
- शीशम (हाइब्रिड) : 14,071
- महोगनी : 11,021
- बकैन : 9,971
- चिलबिल : 8,371
- कैजुराइना/झाऊ : 7,371
- चितवन : 6,071
- अमरूद: 24,121
- आम: 19,421
- अनार: 14,771
- शहतूत: 12,771
- नींबू: 10,371
- करौंदा: 8,071
- बेल: 3,971
फूलों वाले और सजावटी पौधे
- कचनार: 11,771
- चांदनी: 9,371
- गुड़हल: 9,071
- हरसिंगार/पारिजात: 7,771
- बोतल ब्रश: 7,071
- मनोकामिनी: 6,371
- एलिका: 4,821
- जंगल जलेबी: 7,022
- कुल योग: 3,17,120
विदेश दौरे से लौटने के बाद काशी आ सकते हैं मुख्यमंत्री
नगर निगम की ओर से इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रण पत्र भेजा गया है। अब तक उनका प्रोटोकाल प्राप्त नहीं हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि विदेश दौरे से लौटने पर मुख्यमंत्री काशी आ सकते हैं।