प्रदेश अध्यक्ष ने विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, मेयर अशोक तिवारी, पीएमओ और न्यास अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय को पत्र सौंपकर महाबलेश्वर महादेव का वैदिक पूजन शुरू कराने का अनुरोध किया है। विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने विधायक निधि से इसका सुंदरीकरण कराने का आश्वासन दिया है। वहीं, न्यास अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने न्यास की ओर से महाबलेश्वर महादेव का वैदिक पूजन कराने की बात कही है।
काशी में स्वयंभू प्राकट्य महाबल लिंग मुखलिंग है। तीन दशक से भी अधिक समय से नाम अज्ञात होने के कारण और मुखलिंग होने के कारण अज्ञानवश इन्हें शनि के रूप में पूजा जाने लगा। सिंदूर का लेपन कर क्षेत्र निवासी तेल चढ़ाने लगे। आज भी लोग उन्हें शनिदेव ही कहते हैं। खोदाई के बाद जब महाबलेश्वर महादेव का स्वरूप सामने आया है तो स्थानीय लोग भी आश्चर्यचकित हैं। स्कंद पुराण में महाबलेश्वर महादेव के सांबादित्य के पास होने के प्रमाण मिलते हैं। यह काशी के 68 आयतन देवताओं की तरह ही गोकर्ण से काशी आए थे।