आगे सीट पर अजीत और पिछले सीट पर लीलावती और उनका बड़ा पोता आशुतोष बैठा था। राजातालाब पहुंचने पर कार चला रहे शैलेश को लगा की रास्ता भटक गया है। इसी बीच वीरभानपुर के पास अचानक डिवाइडर को पार कर दाएं लेन की ओर बढ़ा। तभी तेज गति से आए ट्रेलर ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि कार हवा में जाकर दूसरी ओर गिर गई।
घटनास्थल पर ही दादी, पोते, पड़ोसी की कार के अंदर ही मौत हो गई तो वहीं शैलेश गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल शैलेश को बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया। अजीत की जेब से मिले मोबाइल के जरिए पुलिस ने बड़े भाई कमल सिंह को हादसे की सूचना दी। हादसे की जानकारी मिलते ही अखिलेश पटेल सहित कमल सिंह अन्य परिजन भी आननफानन में बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर पहुंचे।
मूलरूप से सीवान बिहार की रहने वाली हादसे में मृत लीलावती के पति केंद्रीय कर्मचारी थे। 1980 में प्रयागराज में नौकरी के दौरान घर बनवाकर यही बस गए थे। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे बेटे अखिलेश ने बताया कि 10 साल पहले सेवानिवृत्त होने के बाद पिता की मौत हो गई। तीन बेटों में अखिलेश, शैलेश, दिनेश हैं। लीलावती अपने घर सीवान बिहार खेती का हिसाब करने बड़े बेटे और छोटे भाई शैलेश के साथ जाने के लिए ट्रेन पकड़ने कैंट के लिए निकली थीं।
अंदावा के रहने वाले स्व. रामानुज सिंह के तीन बेटों में अजीत सबसे छोटा था। उसकी रत्ना सिंह और दो बच्चे अथर्व 6 साल व अर्नव 3 साल के हैं। अजीत भाइयों के साथ मिलकर खेती करता था। बीएचयू स्थित मोर्चरी हाउस पहुंचे अजीत के बड़े भाई कमल और दिवाकर बेसुध रहे। बार-बार यही कह रहे थे कि सुबह निकलने के लिए मना किया था, काश बात मान गया होता तो आज यह दिन नहीं देखने पड़ते।