खोजबीन के बाद तीनों को बाहर निकाला। जानकारी के बाद कोतवाली पुलिस पहुंच गई और तीनों को लेकर जिला संयुक्त चिकित्सालय ले आई। यहां बाढु राजभर और दीपक को मृत घोषित कर दिया था। वहीं, चंद्रेश राजभर की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना को लेकर आनन-फानन कोतवाली पुलिस ने पशु तस्करों के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय भेज दिया।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस के अभियान के क्रम में छापेमारी के बीच पशु तस्कर बेबस होकर नदी में कूद पड़े, जिससे उनकी जान चली गई । घटना की जानकारी होते ही बुधवार को डीआईजी वाराणसी एसके भगत पुलिस अधीक्षक, अमित कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान शहाबगंज, बबुरी और इलिया की पुलिस मौजूद रही।
घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और लोग।
- फोटो : अमर उजाला
डीआईजी वाराणसी एसके भगत ने बताया कि घटनास्थल की जांच की गई है। डर की वजह से पशु तस्कर वाहन छोड़कर कर्मनाशा नदी में कूद गए थे। नदी में पानी कम था और जमीन पर जा गिरे। जिससे उनकी मौत हो गई है। पशु तस्करी में लिप्त बिना नंबर की पिकअप जौनपुर के शाहगंज से रजिस्ट्रेशन होने की सूचना मिल रही है। मामले में पूरी जांच की जा रही है।
पुलिस के घेराबंदी से गई बेटों की जान
घुरहुपुर गांव के निवासी पशु तस्कर बाढु राजभर के पिता रामविलास ने कहा कि बेटे को ऐसे छोटे कामों को करने से मना किया था। लेकिन वह नहीं माना। वहीं बाढु के चचेरे भाई चंद्रेश(19) के पिता श्रीनिवास ने कहा कि ऐसे काम करने की जानकारी हमें नहीं थी। परिवार को न बता कर किसी के बहकावे में आकर उन्होंने ऐसा काम पहली बार किया था। उन्होंने कहा कि पुलिस की घेराबंदी से डर कर बेटे ने कर्मनाशा नदी में बेबस होकर छलांग लगा दी। जिससे उसकी जान चली गई। आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई ठीक नहीं है।