यूपी के मिर्जापुर स्थित सिद्धनाथ की दरी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। यहां जिले के अलावा पूर्वांचल के कई जनपदों से भी लोग पिकनिक मनाने आते हैं। लेकिन यहां सुरक्षा और साफ सफाई समेत बुनयिदी सुविधाओं का अभाव है।
आए दिन सैलानियों के साथ बदसलूकी की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। खतरे के चलते वर्तमान में जिला प्रशासन ने कई जल-प्रपातों में स्नान करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। एकमात्र सिद्धनाथ की दरी ही है जहां स्नान करने पर प्रतिबंध नहीं है।
राजगढ़ ब्लाक के जौगढ़ गांव में स्थित सिद्धनाथ की दरी जल-प्रपात एक किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। रविवार व अन्य छुट्टियों के दिनों में बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ पिकनिक मनाने आते हैं। सैलानियों को लुभाने के लिए यहां अपेक्षित व्यवस्था नहीं की गई है।
सिद्धनाथ की दरी जल-प्रपात से सटे स्वामी अड़गड़ानंद महाराज का आश्रम है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में सैलानी यहां प्रकृति के सौंदर्य का आनंद उठाने के बाद आश्रम में जाकर स्वामी जी का आशीर्वाद लेते हैं।
वर्तमान में जिला प्रशासन ने अहरौरा की लखनिया दरी, विंढम फाल आदि जल-प्रपातों में स्नान करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। एकमात्र सिद्धनाथ की दरी ही है जहां स्नान करने पर कोई खतरा नहीं होने के कारण प्रतिबंध से मुक्त है।
ऐसे में इलाहाबाद, चंदौली, भदोही, वाराणसी, सोनभद्र से बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने आते हैं। यहां सफाई का अपेक्षित इंतजाम नहीं होने के कारण कूड़ा बिखरा रहता है। जिला पंचायत विभाग की ओर से ध्यान नहीं दिए जाने के कारण सैलानियों को सुविधाएं नहीं मिल पाती है। सिद्धनाथ की दरी का धार्मिक महत्व भी है।