बीएचयू में थर्ड जेंडर के सम्मान करने पर मंथन हुआ। इस दौरान सामाजिक विज्ञान संकाय प्रमुख ने कहा कि महाराष्ट्र और काशी की वैदिक शिक्षा में स्त्रियों की भागीदारी और शैक्षणिक व्यवस्था उनके विमर्श के प्रमुख केंद्र रहे हैं।
बीएचयू में शनिवार को थर्ड जेंडर के अधिकारों, सम्मान और सहयोग पर चर्चा हुई। महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र में मेरी दृष्टि, मेरा अनुभव की थीम पर डॉ. मीनाक्षी झा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की सफलता इस बात में निहित है कि महिलाएं जीवन की चुनौतियां कैसे स्वीकारती हैं।
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सामाजिक विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. बिंदा परांजपे ने कहा कि महाराष्ट्र और काशी की वैदिक शिक्षा में स्त्रियों की भागीदारी और शैक्षणिक व्यवस्था उनके विमर्श के प्रमुख केंद्र रहे हैं। अंग्रेजी विभाग की प्रो. आरती निर्मल ने कहा कि स्त्री विमर्श के साथ-साथ थर्ड जेंडर पर लोगों की समझ विकसित होनी चाहिए।
विशेष अतिथि प्रो. गंगाथरन ने कहा कि हर क्षेत्र की स्त्री समस्याएं अलग-अलग हैं। वाग्मिता प्रतियोगिता में शिक्षा संकाय की प्रज्ञा को पहला और अंग्रेजी विभाग में शिवम मिश्रा और अभिनव को दूसरा और तीसरा पुरस्कार मिला।
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आईआईटी-बीएचयू की मानविकी विभाग की प्रो. विनीता चंद्रा ने कहा कि स्त्रियों की वेशभूषा और प्रतीक भी पुरुषों की मानसिकता की उपज है। इसमें ग्रीन विमेन आर्मी की स्त्रियों ने भागीदारी की। हस्त निर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगी।