सत्रह दिन में मंगलवार को चौथी बार धरती कांप उठी तो लोग सिहर उठे। घर, दफ्तर, कारखाना, जो जहां था, वहां से बाहर निकल कर भागा। महज डेढ़ घंटे में तीन बार आए भूकंप शहर में दहशत का माहौल बन गया था। धरती में जरा कंपन होने पर लोग तपती दुपहरी में घर से बाहर भागने लगे। इस भागदौड़ में कई लोग गिरकर घायल हुए। कुछ लोग गश खाकर भी गिरे। शार्ट सर्किट के चलते परेड कोठी के एक गोदाम में आग लग गई।
बिजली गुल हो गई और मोबाइल नेटवर्क भी घंटे भर ध्वस्त रहा। जानेमाने भूगोलविद और विद्यापीठ के कुलपति पृथ्वीश नाग ने बताया कि भूकंप पहला झटका रिक्टर पैमाने पर छह के आसपास रहा जबकि दूसरे और तीसरे झटके इससे कम तीव्रता के थे। दोपहर 12.37 मिनट अचानक धरती में कंपन होने लगा। लगभग 45 मिनट तक धरती में कंपन होता रहा। भूकंप झटके इतने तेज थे कि ब्रह्मा घाट के डा. जेपी शास्त्री के दोमंजिला मकान का पटिया गिर गया। बैंक, दूकान, कॉलेज, अस्पताल, आरटीओ कार्यालय, हरहुआ बाटलिंग गैस प्लांट परिसर में भगदड़ मच गई थी। मंडलायुक्त सभागार में बैठक में शामिल अधिकारी भागकर बाहर आ गए। भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई लोग गश खाकर गिर गए।
कचहरी परिसर में एक शख्स भूकंप के दौरान चक्कर खाकर गिर पड़ा। भूकंप के सहमें वकील और वादकारी चौकी छोड़ बाहर भागे। भगदड़ में कई लोगों को चोटें भी आईं। लोहता के रहीमपुर की शबीना नामक युवती बेहोश हो गई, उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। ग्रामीण इलाकों में कई लोगों ले भूकंप की वजह से दीवारों और छतों में दरार आने की शिकायत की है। दूसरा झटका एक बजकर 9 मिनट पर और तीसरा एक बजकर 51 मिनट पर महसूस किया गया।
बिजली के तार टकराने की वजह से कई जगह स्पार्किंग हुई और लाइनें ट्रिप कर गईं। मोबाइल नेटवर्क घंटे भर ध्वस्त रहा। इस दौरान डाटा सर्विसेज भी प्रभावित हुईं। मारे भय के कई कालोनियों में लोग घर से बाहर आए तो कड़ी धूप के बावजूद बाहर ही ख़ड़े रहे। उनके चेहरे पर खौफ साफ देखा जा सकता था।