फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रविदास जयंती 2022: वाराणसी के सीर में इमली का पेड़ बना रैदासियों की आस्था का केंद्र, बांधते हैं मन्नत का धागा

Sat, 05 Feb 2022 05:37 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

सीर में इमली का पेड़ बना संत रविदास का गांव सीर गोवर्धन रैदासियों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। संत के मंदिर के साथ ही लगे इमली के पेड़ से रैदासियों की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। 
विज्ञापन
संत रविदास मंदिर से सटा हुआ है इमली का पेड़ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संत रविदास का गांव सीर गोवर्धन रैदासियों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। संत के मंदिर के साथ ही लगे इमली के पेड़ से रैदासियों की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। गुरु चरणों की रज पाने के लिए देश और विदेश से आने वाले रैदासी इमली के पेड़ में कलावा जरूर बांधते हैं और मन्नत भी मांगते हैं।

विज्ञापन


मान्यता है कि इसी इमली के पेड़ के नीचे बैठकर संत रविदास सत्संग किया करते थे। संत रविदास मंदिर के ट्रस्टी के एल सरोआ ने बताया कि संत हरिदास ने जब मंदिर की नींव रखी तब इमली का पेड़ सूखा हुआ था, लेकिन लगातार पानी देने से उसकी जड़ें फिर से हरी हो गईं।

आज यह पेड़ का रूप ले चुका है और रैदासियों के लिए आस्था का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ अवसर पर इमली के पेड़ पर मौली बांधने आते हैं। संत रविदास की जयंती पर सीर आने वाला हर श्रद्धालु संत रविदास के मंदिर में चरण रज पाने के बाद इमली के पेड़ की भी परिक्रमा करता है।
विज्ञापन

पढ़ेंः वाराणसी के सीर गोबर्धन में उमड़ेगा अनुयायियों का रेला, सुरक्षा व्यवस्था का एडिशनल सीपी ने लिया जायजा

खासकर महिलाएं इस पेड़ की फेरी लगाती हैं और मत्था टेककर अपने गुरु की श्रम साधना स्थली का आशीर्वाद लेकर जाती हैं। स्थानीय निवासी राजकुमार यादव ने बताया कि इमली के पेड़ में लोगों की काफी आस्था है। यहां की मिट्टी को भी लोग पूजते हैं।
विज्ञापन

सेवादारों ने संभाली तैयारियों की कमान

सीर गोवर्धनपुर में लगाए गए टेंट - फोटो : अमर उजाला
 संत रविदास की जयंती समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा के सेवादारों ने सेवा की कमान भी संभाल ली। जत्थे के पहुंचने के साथ ही संत रविदास मंदिर में सुबह और शाम की अमृतवाणी का पाठ भी आरंभ हो गया। मेले की रंगत 10 फरवरी से और भी चटख होने लगेगी। मेले की दुकानें भी सजने लगेंगी। ब्यूरो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें