सड़कों पर बारिश का पानी भरने से फंसे रहे राहगीर।
करीब दस दिनों तक आसमान साफ रहने के बाद शनिवार को फिर बादलों से आसमान ढक गया। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे के बीच अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर जबरदस्त बारिश हुई। छिटपुट बारिश का सिलसिला इसके बाद भी रात तक चला लेकिन अलग-अलग हिस्सों में डेढ़ से दो घंटे की मुसलधार बारिश से सड़कें-गलियां जलमग्न हो गईं। कहीं घुटने भर तो कहीं इससे भी अधिक पानी लग गया। जगह-जगह सीवर ओवरफ्लो करने से सांसत और बढ़ी। दर्जनों दूकानों, मकानों पानी घुस गया। तेज हवाओं के साथ बादलों की जबरदस्त घेरेबंदी से दृश्यता इतनी कम हो गई कि दोपहर में वाहन हेडलाइट के सहारे गुजरे।
शनिवार को शहर में 49.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। सुबह से ही बादलों की घेरघार शुरू हो गई थी। दिन चढ़ने के साथ घेराबंदी भी तेज हुई। फिर शुरू हुआ तेज हवा के साथ बारिश का सिलसिला। सुबह आठ बजे बीएचयू, नरिया, सुंदरपुर, डीरेका में मेघ जमकर बरसे तो करीब घंटे भर बाद वरुणा पार के इलाके में जोरदार बारिश हुई। दोपहर 12 बजे के करीब मंडुवाडीह, महमूरगंज, सिगरा, रथयात्रा, ककरमत्ता, चितईपुर, चांदपुर, बौलिया आदि इलाकों में बारिश से हर तरफ जलभराव की समस्या झेलनी पड़ी।
किसानों के लिए हालांकि यह बारिश फायदेमंद बताई जा रही है लेकिन आम शहरियों के लिए यह आफत की बारिश रही। शहर के निचले इलाकों में बारिश के साथ ही सीवर ओवरफ्लो करने से मुसीबत बढ़ी। निचली सतह की बस्तियों के साथ सड़क किनारे की कई दूकानों में पानी घुसने से अफरातफरी मची रही। बीएचयू अस्तपाल परिसर में जलभराव से मरीज और तीमारदार बेहाल हुए। खासकर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को दिक्कतें हुईं। यहां इमरजेंसी के आसपास कमर तक पानी लगा था।
दोपहर में बादलों की वजह से एक समय इतना अंधेरा हो गया कि सड़कों पर चल रहे वाहन हेडलाइट्स के सहारे आगे बढ़ते दिखे। थोड़ी ही देर बाद तेज हवा से बादल तो छंटे मगर जबरदस्त बारिश के चलते एक बार फिर दृश्यता कम हो गई। इसका असर परिवहन सेवाओं पर पड़ा। कैंट रेलवे स्टेशन परिसर के अंदर और बाहर जलभराव से दिक्कतें हुईं। इंग्लिशियालाइन से रोडवेज तक सड़क पर जलभराव से आवाजाही प्रभावित हुई।