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काशी की माटी ने रानी लक्ष्मीबाई को स्वतंत्र रहना सिखाया : प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र

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रानी लक्ष्मीबाई के जन्मस्थली पर कार्यक्रम में शामिल लोग संवाद - फोटो : योगेश कुशवाहा
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वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 168वीं पुण्यतिथि बृहस्पतिवार को उनके भदैनी स्थित जन्मस्थली पर मनाई गई। जागृति फाउंडेशन एवं महारानी लक्ष्मीबाई जन्म स्थान स्मारक समिति की ओर से पुण्यतिथि महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, विशिष्ट अतिथि भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय, बीएचयू के प्रो. देवव्रत चौबे एवं फाउंडेशन के महासचिव समाजसेवी रामयश मिश्र ने किया।
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प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि वीरांगना झांसी की रानी महारानी लक्ष्मीबाई काशी की बेटी थी। काशी की माटी ने ही उन्हें स्वतंत्र रहना सिखाया। ये काशी के संस्कार ही थे जिससे उन्होंने हर लड़ाई जीती और उन्होंने महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक अमूल्य योगदान देते यह संदेश दिया कि महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। काशी की बेटी ने देश की आजादी की लड़ाई में जो योगदान दिया, वह सिद्ध करता है कि रानी लक्ष्मीबाई एक मजबूत महिला थीं और किसी के आगे अपना सर झुकाने को तैयार नहीं थीं।
अशोक पांडेय और नागेश सिंह ने देश की धरती के लिए अपना प्राण न्योछावर करने वाली वीरांगना को शत-शत नमन किया। कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली पर दुर्व्यवस्था को जिला प्रशासन से इसे ठीक करने की करे। कम से कम महारानी लक्ष्मीबाई के जन्म तिथि और पुण्यतिथि पर सरकारी आयोजन करके उनका नमन करें। रामयश मिश्र ने केंद्र और राज्य सरकार से महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर काशी से ग्वालियर तक वीरांगना एक्सप्रेस चलाए जाने की मांग की। सपा नेता सुबेदार सिंह, सीपी जैन, राघवेंद्र पांडेय आदि ने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन विश्वनाथ यादव ने किया। इस मौके पर विनोद पांडेय, स्वर्ण प्रताप चतुर्वेदी, राजेश कुमार दीक्षित, हृदय नारायण मिश्रा, डॉ. सनी सिंह, गायत्री कुमारी मौर्या, ज्ञानू पांडेय आदि रहे।
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