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पिछड़ा बाहुल्य है सीट, दांव पर है वर्तमान विधायक की प्रतिष्ठा

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अतरौलिया विधान सभा सीट पर फिलहाल सपा व निषाद पार्टी के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है लेकिन वहीं बसपा भी इस सीट पर कड़ी टक्कर देते हुए मुकाबले को त्रिकोणिय बनाने में जुटी नजर आ रही है। इस सीट पर पिछड़ा वर्ग का मतदाता सर्वाधिक संख्या में है लेकिन मुस्लिम व अनुसूचित मतदाता जिस ठौर बैठेंगे उधर का पलड़ा कुछ ज्यादा भारी हो जाने की संभावना जताई जा रही है। इस सीट से वर्तमान सपा विधायक ही नहीं बल्कि उनके पिता पूर्व मंत्री बलराम यादव की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है।
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अतरौलिया विधान सभा सीट से वर्तमान में समाजवादी पार्टी के डॉ. संग्राम यादव विधायक है। इस बार भी सपा ने उन्हें ही अपना प्रत्याशी बनाया है। भाजपा इस पर सीट को गठबंधन के सहयोगी निषाद पार्टी को देकर खुद किनारा कर ली है। निषाद पार्टी ने इस सीट से प्रशांत सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। सामान्य वोट के साथ ही वैश्य पिछड़ी जाति के वोट के सहारे निषाद समाज के वोट के बल पर मजबूती से मैदान में खड़े हैं। बहुजन समाज पार्टी ने भी इस बार सीट पर सामान्य वर्ग को मौका दिया है और क्षेत्र के प्रतिष्ठित डॉ. सरोज पांडेय को अपना प्रत्याशी बनाया है। बसपा प्रत्याशी भी अनुसूचित मतों के साथ ही सामान्य व अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंधमारी कर चुनावी मुकाबले को त्रिकोणिय बनाने में जुटे है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस सीट से रमेश दूबे को अपना प्रत्याशी बनाया है। इस विधान सभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या तीन लाख, 79 हजार 447 है। जिसमें पुरूष मतदाताओं की संख्या एक लाख 96 हजार 017 है तो वहीं महिला मतदाता एक लाख 83 हजार 426 है। ट्रांस जेंडर मतदाताओं की बात की जाए तो इस सीट पर इनकी संख्या मात्र चार है। 2017 के विस चुनाव में इस सीट पर 58.72 प्रतिशत मतदान हुआ था। संवाद
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सर्वाधिक पांच बार बलराम यादव ने दर्ज की जीत
आजमगढ़। अतरौलिया विस सीट पर सर्वाधिक पांच बाद पूर्व मंत्री बलराम यादव ने जीत दर्ज की है तो वहीं पिछले दो चुनाव ने बलराम यादव के पुत्र डॉ. संग्राम यादव का इस सीट पर कब्जा है। भाजपा का कमल कभी इस सीट पर अब तक नहीं कि सका है। 1977 से अब तक हुए 11 विधानसभा चुनावों में दो बार बसपा को भी जीत नसीब हुई है। 1977 में कांग्रेस के जंग बहादुर, 1980 में कांग्रेस के शंभूनाथ, 1985 में एलकेडी के बलराम यादव, 1989 में जनता दल के बलराम यादव, 1991 में जनता पार्टी के बलराम यादव, 1993 में सपा के बलराम यादव ने जीत दर्ज किया। 1996 में बसपा के विभूति प्रसाद निषाद, 2002 में सपा के बलराम यादव व 2007 में बसपा के सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा ने जीत दर्ज किया। बीते दो चुनाव से पूर्व मंत्री बलराम यादव के पुत्र डॉ. संग्राम यादव इस सीट का विधान सभा में प्रतिनिधित्व कर रहे है। इस बार भी वे सपा से मैदान में है।
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1993 व 2017 के चुनाव में भाजपा पहुंची थी नंबर दो पर
आजमगढ़। अतरौलिया विस सीट पिछड़ा बाहुल्य है। दूसरे नंबर पर सामान्य वर्ग तो इसके बाद अनुसूचित जाति के मतदाता है। निषाद वोट बैंक भी इस सीट पर अच्छा खासा है, जिसके चलते इस बार भाजपा ने इस सीट को गठबंधन के साथी निषाद पार्टी को दे दिया है। भाजपा की बात की जाए तो इस सीट पर मात्र 1993 व 2017 के चुनाव में पार्टी को दूसरा स्थान मिल सका था। 1993 में भाजपा के इंद्रसेन उर्फ श्याम बहादुर तथा 2017 में भाजपा कन्हैया निषाद दूसरे नंबर पर थे।
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प्रत्याशियों की मजबूती
डॉ. संग्राम यादव, सपा
- यादव और मुस्लिम मतदाताओं का साथ।
- पार्टी द्वारा जनपद में कराए गए विकास कार्य।
- जनता के बीच रहकर कार्य करना।
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डॉ. सरोज पांडेय, बसपा
- सामान्य व मुस्लिम मतदाताओं में अच्छी पैठ।
- बसपा के परंपरागत दलित वोट।
- साफ-सुथरी छवि का होना।
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प्रशांत सिंह, निषाद पार्टी
- भाजपा के परंपरागत वोटरों के अलावा निषाद वोट बैंक।
- मुस्लिम वोट बैंक का सपा-बसपा में बंटवारा।
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प्रत्याशियों की कमजोरी
डॉ. संग्राम यादव, सपा
- मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव।
- सामान्य जाति के वोट में कमजोर सेंधमारी।
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डॉ. सरोज पांडेय, बसपा
- देर से प्रत्याशी घोषित होना।
- कांग्रेस से भी ब्राह्मण प्रत्याशी होना।
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प्रशांत सिंह, निषाद पार्टी
- पहली बार चुनाव मैदान में उतरना।
- क्षेत्र में ज्यादा राजनीतिक पकड़ न रखना।
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वोटों का अनुमानित गणित
मुस्लिम: 24574
दलित: 85015
यादव: 60146
निषाद: 32364
अन्य पिछड़ी: 98373
क्षत्रिय: 35973
ब्राह्मण: 32530
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2017 के चुनाव परिणाम (प्रमुख प्रत्याशी)
प्रत्याशी पार्टी मिले मत
डॉ. संग्राम यादव, सपा, 74273
कन्हैया लाल निषाद, भाजपा, 71809
अखंड प्रताप सिंह, बसपा, 56536
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