हाथियों के झुंड द्वारा रौंदी गई धान की फसल दिखाता काश्तकार।
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अध्ययन-अध्यापन के लिए प्रसिद्ध काशी हिंदू विश्वविद्यालय के खास धान की प्रजातियों की फसल किसानों के खेतों में लहलहाएगी। बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान ने धान की तीन विशेष प्रजातियां तैयार की हैं। प्रजातियां कई मायनों में खास है, मसलन पकने पर सुगंधित, खाने में स्वादिष्ट और पैदावार भी खूब। यही नहीं, इनकी फसल बहुत कम समय में तैयार होती है।
कृषि विज्ञान संस्थान ने दो प्रजातियां किसानों को जारी करने के लिए संस्तुति करने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा है। तीसरा प्रस्ताव इसी सप्ताह भेजा जाएगा। अगर राज्य सरकार इसका नोटिफिकेशन जारी कर केंद्र सरकार को भेज देती है तो अगले साल तक किसानों को इन प्रजातियों के बीज उपलब्ध हो जाएंगे। ऐसा होने पर अगले मौसम में किसान इसका लाभ उठा सकेंगे।
एचयूआर 1304: ये प्रजाति लंबे दानों के साथ बेहद सुगंधित होती है। पैदावार करीब 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। इसकी फसल तैयार होने में 105-110 दिन का समय लगता हैं।
एचयूआर 1309: बादशाह, जीरा बत्तीस, काला नमक की तरह ये छोटे दाने की सुगंधित प्रजाति है। फसल 110 से 115 दिन में तैयार होती है। पैदावार 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
एचयूबीआर 1202: बासमती प्रजाति की फसल में दाने करीब डेढ़ सेंटीमीटर लंबे और सुगंधित हैं। फसल में 125-130 दिन लगते हैं। फसल में गोबर की खाद इस्तेमाल की जाए तो स्वाद बढ़ जाएगा।