कोहरे ने ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। हालात ऐसे हैं कि ट्रेनें सामान्य गति से भी नहीं चल पा रही हैं। दिल्ली से वाराणसी आने वाली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मंगलवार को दो दिन बाद यहां कैंट स्टेशन पहुंची। दिल्ली से वाराणसी तक का 12 घंटे का सफर तय करने में उसे 56 घंटे लग गए।
लंबी दूरी की सभी ट्रेनों की हालत कमोबेश ऐसी ही है। प्लेटफार्मों पर ट्रेनों का इंतजार करते यात्री बेहाल हैं तो वहीं सफर में फंसे यात्रियों की भी दुश्वारियां कम नहीं। कंपकंपी छुड़ाती शीतलहर के बीच ट्रेनों की घंटों लेटलतीफी हर किसी के लिए मुसीबत का सबब बन गई है।
मंगलवार को आनंद विहार से सीतामढ़ी जाने वाली लिच्छवी एक्सप्रेस दस घंटे, हावड़ा से इलाहाबाद जाने वाली विभूति एक्सप्रेस 8 घंटे, जोधपुर से वाराणसी आने वाली मरुधर एक्सप्रेस 10 घंटे, ग्वालियर से वाराणसी आने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस 8 घंटे, पटना से जम्मू जाने वाली ट्रेन 16 घंटे, कोटा से पटना जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन 10 घंटे देरी से चल रही थीं। अन्य ट्रेनों का भी ऐसा ही हाल था।