दिल धड़कता रहेगा और डॉक्टर आपरेशन करके धमनियों की रुकावट खत्म कर देंगे। आपरेशन के दौरान दिल की रफ्तार को बनाए रखने के लिए किसी बाहरी उपकरण की जरूरत नहीं होगी। बीएचयू के सर सुंदरलाल चिकित्सालय के हृदय शल्य विभाग (कार्डियो वैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी) ने अलविदा होते इस वर्ष में यह उपलब्धि हासिल की है।
अस्पताल में पहली बार सफलतापूर्वक ऑफ पंप बाईपास सर्जरी (धड़कते दिल में आपरेशन) की गई है। पहले इस तरह के आपरेशन के लिए अन्य शहरों से विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाना पड़ता था। इससे इलाज का खर्च तो बढ़ता ही था, मरीज को काफी दिनों तक इंतजार भी करना पड़ता था।
हृदय शल्य विभाग के एमरेटस प्रोफेसर टीके लहरी के निर्देशन में डॉक्टरों की टीम नेे तीन दिसंबर को रामलखन नामक 52 वर्षीय मरीज की आफ पंप सर्जरी की। आपरेशन पूरी तरह से सफल रहा और मरीज स्वस्थ है। आपरेशन करने वाली टीम में विभागाध्यक्ष प्रो. दमयंती अग्रवाल, प्रो. एके माथुर, डॉ. मुकेश कुमावत भी शामिल रहे।
डॉ. कुमावत के अनुसार हृदय में खून की सप्लाई करने वाली धमनियां अवरुद्ध या सिकुड़ जाती हैं तो मरीज को हृदय में दर्द और हृदय घात का खतरा हो जाता है। ऐसे में आपरेशन करके धमनी को दुरुस्त करना पड़ता है, जिसे बाईपास सर्जरी कहते हैं। इस तरह का आपरेशन दो तरीके से किया जा सकता है।
एक में आपरेशन के दौरान हृदय में कृत्रिम तरीके से पंप करके ब्लड सप्लाई की जाती है। इसे आन पंप सर्जरी कहते हैं जबकि दूसरे आफ पंप विधि में हृदय की धड़कन चालू रखते हुए आपरेशन किया जाता है। दूसरी पद्धति ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है और इसमें खर्च भी कम आता है।