गंगा में सीएनजी किट युक्त मोटरबोट संचालित कर प्रदूषण कम करने की मुहिम मंद पड़ गई है। ऐसे में देव दीपावली तक डीजल से चलने वाली 500 मोटरबोटों को सीएनजी से लैस करने का लक्ष्य पूर्ण होने पर संशय है।
देव दीपावली तक डीजल से संचालित 500 मोटरबोटों को सीएनजी से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि अब तक लगभग 175 मोटरबोटों को ही सीएनजी में बदला जा सका है। बचे 10 दिनों में 300 से अधिक मोटरबोटों में सीएनजी किट लगाई जानी है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि पहले कोरोना संक्रमण फिर बाढ़ से इस काम की रफ्तार प्रभावित हो गई। यद्यपि नगर निगम के अधिकारी इस काम को समय पर पूर्ण कर लेने का दावा कर रहे हैं। अपर नगर आयुक्त दुष्यंत कुमार मौर्य ने कहा कि डीजल बोटों को सीएनजी में तब्दील करने का काम तेजी से चल रहा है। तय समय पर इसे पूरा करने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
गौरतलब है कि गंगा में सीएनजी की मोटरबोट संचालित होने लगेंगी तो प्रदूषण पर काफी हद तक रोक लगेगी। लोगों को डीजल बोट के धुएं से मुक्ति मिलेगी और शोर भी कम होगा। ये मोटरबोट डीजल की तुलना में किफायती भी मानी जाती हैं।
लाइसेंस के लिए देना होगा विलंब शुल्क
गंगा में संचालित होने वाली नावों और मोटरबोटों को लाइसेंस लेने के लिए नगर निगम ने 31 अक्तूबर तक की तिथि निर्धारित की थी। मगर, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 450 हाथ से चलने वाली नावों और मोटरबोट ने ही लाइसेंस लिया है। छूट की अवधि समाप्त होने के बाद अब लाइसेंस के लिए विलंब शुल्क भी देना होगा। पिछले वर्ष 918 लाइसेंस जारी किए गए थे। इनमें 136 सीएनजी मोटरबोट थीं।