सीय चलत व्याकुल पुरबासी, होहिं सगुन सुभ मंगल रासी॥ भूसुर सचिव समेत समाजा, संग चले पहुंचावन राजा॥ सीताजी की विदाई होते ही जनकपुरी वासी व्याकुल हो उठे। ब्राह्मण और मंत्रियों के साथ राजा जनक प्रजा को समझाते हैं। रामनगर की रामलीला में सातवें दिन गुरुवार को जनकपुर से बरात की विदाई, अवध में परिछन तथा शयन की झांकी की लीला का मंचन हुआ।
महाराज जनक से आज्ञा पाकर बारात विदा हुई। जनकपुर के लिए जहां महारानी कौशल्या समेत तीनों माताएं और सभी नर-नारी बरात वापसी की राह में पलकें बिछाए हुए थे। आखिर वह पावन बेला आई। बारात अयोध्या पहुंचते ही ढोल नगाड़े बज उठे। एक तरफ मंगल गीतों का मधुर गायन तो दूसरी और पुष्पों की वर्षा हो रही थी। विधि विधान के साथ हर्षित माताओं ने नववधुओं का परिछन किया और फिर गूंज उठी श्री राम की जय जय कार।