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भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती: हिंदी को अदालती भाषा बनाने का सपना आज भी अधूरा, भारतेंदु बाबू ने की थी पैरवी

Fri, 09 Sep 2022 09:46 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने साल 1882 में तत्कालीन शिक्षा आयोग हंटर कमीशन के समक्ष हिंदी को अदालती भाषा बनाने पर जोरदार पैरवी की थी। कमीशन के सामने अपनी गवाही में कहा था यदि हिंदी अदालती भाषा हो जाए, तो समन पढ़वाने के लिए दो-चार आने कौन देगा और साधारण सी अर्जी लिखवाने के लिए कोई रुपया-आठ आने क्यों देगा ? 
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भारतेंदु हरिश्चंद्र
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विस्तार
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हिंदी को अदालती भाषा बनाने का भारतेंदु हरिश्चंद्र का सपना 140 साल बाद भी अधूरा ही है। भारतेंदु बाबू ने वर्ष 1882 में तत्कालीन शिक्षा आयोग हंटर कमीशन के समक्ष इसको लेकर जोरदार पैरवी की थी। कमीशन के सामने अपनी गवाही में कहा था यदि हिंदी अदालती भाषा हो जाए, तो समन पढ़वाने के लिए दो-चार आने कौन देगा और साधारण सी अर्जी लिखवाने के लिए कोई रुपया-आठ आने क्यों देगा। तब पढ़ने वालों को यह अवसर कहां मिलेगा कि गवाही के समन को गिरफ्तारी का वारंट बता दें।
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नवगीतकार सुरेंद्र वाजपेयी ने बताया कि निज भाषा उन्नति अहै...का मूलमंत्र देने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म नौ सितंबर 1850 को चौखंभा में हुआ था। भारतेंदु हरिश्चंद्र हिंदी भाषा के उन्नायक के साथ भारतीयता और सनातन संस्कृति से भी ओतप्रोत थे। देश से गोवध समाप्त करने के लिए 1877 में साठ हजार हस्ताक्षर कराकर लार्ड लिटन को भेजा था। वे हस्ताक्षर अभियान के प्रणेता हैं ।
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भारतेंदु हरिश्चंद्र
भारतेंदु को वर्तमान का कर्ण कहते थे 
बनारस बार के पूर्व महामंत्री व अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि एक दिन मोतियों का कंठा पहनकर भारतेंदु गोस्वामी जी जीवानाचार्य के दर्शन के लिए पहुंचे। गोस्वामी के मात्र इतना कहने पर कि बाबू यह कंठा बहुत सुंदर है, भारतेंदु ने तुरंत उसे गोस्वामी के चरणों में अर्पित कर दिया। दयालुता और दान के इतने किस्से हैं कि काशी वासी इन्हें वर्तमान काल का कर्ण कहा करते थे। भारतेंदु जी ने काशी का इतिहास लिखने के उद्देश्य से मंदिरों, घाटों और महत्वपूर्ण स्थानों का फोटो संग्रह भी किया था। इस काम को वह पूरा कर पाते कि असमय मृत्यु ने इसे वंचित कर दिया। 1867 में कवि वचन सुधा पत्रिका के जरिये उन्हें स्वतंत्रता की मांग रखी।
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