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बाढ़ के बाद काशी में अब नई मुसीबत: दशाश्वमेध घाट की कई दुकानें अभी भी बंद, इन मुश्किलों से कैसे लड़ेगा बनारस ?

Thu, 08 Sep 2022 12:49 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी में गंगा में बाढ़ के बाद अब दूसरी परेशानियों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बाढ़ के बाद से घाटों पर इतनी गंदगी जमा हो गई है कि श्रद्धालुओं का आना कम हो गया है। वहीं पानी भर जाने से कई दुकानें खराब हो गई हैं। 
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दशाश्वमेध घाट का नजारा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में गंगा घाटों की सीढ़ियों पर अभी भी गंदगी व मिट्टी जमा होने से श्रद्धालुओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दशाश्वमेध घाट पर तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि पितृपक्ष में श्रद्धालुओं को कैसे पूजा पाठ कराएंगे। नगर निगम प्रशासन साफ-सफाई ठीक से नहीं करवा रहा है। गंगा सेवा निधि के कार्यकर्ता साफ-सफाई कर रहे हैं, ताकि जल्द गंगा आरती शुरू हो सके। वहीं, जल पुलिस की चौकी के शीशे, दरवाजे व खिड़कियां टूट चुकी हैं।
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दशाश्वमेध घाट पर अभी भी पूरी दुकानें नहीं खुल पाई हैं। दुकानदारों का कहना है कि दुकानों की मरम्मत कराने में 10 हजार रुपये से अधिक खर्च होंगे। बाढ़ के समय दुकान से सामान हटाते समय काफी नुकसान हुआ। ज्यादा दिन पानी में रहने से कुछ सामान खराब भी हो गए हैं। 
 

दशाश्वमेध घाट पर जमा गाद और गंदगी - फोटो : अमर उजाला
तीर्थ पुरोहितों का कोट
श्रद्धालुओं को स्नान करने में दिक्कत हो रही है। सीढ़ियों पर गंदगी होने से पूजा पाठ करने व कराने में दिक्कतें आ रही हैं।- हीरानंद पांडेय दशाश्वमेध घाट
बाढ़ कम होने के बाद भी श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि नहीं हुई है। पितृपक्ष में संख्या बढ़ने की उम्मीद है। आमदनी में भी कमी आई है। - लाली पांडेय, दशाश्वमेध घाट  

दुकानदारों से बातचीत
दुकान बंद होने से पारिवारिक समस्या बढ़ गई है। घर का खर्चा चलाने में मुश्किलें आ रही है। पानी भर जाने से दुकान खराब हो गई है।- सतीश, दशाश्वमेध घाट
20 दिन से दुकान बंद है। दुकान में लगी लकड़ियां सड़ गई हैं। समान भी एक जगह बांध कर रखने से खराब हो रहा है। - सुनील कुमार मिश्रा, दशाश्वमेध घाट
 
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दशाश्वमेध घाट पर जमा गाद और गंदगी - फोटो : अमर उजाला

श्रद्धालुओं से बातचीत 
घाट की सीढ़ियों पर जमा मिट्टी के चलते उतरने-चढ़ने में मुश्किल आ रही है। गंदगी होने से स्नान करने में परेशानी हो रही है। - चंदन कुमार, गया
साफ -सफाई नहीं होने से दिक्कत आ रही है। सीढ़ियों पर फिसलन ज्यादा है। गिरने का डर है। कपड़े रखने की जगह नहीं है।- रंगेश कुमार शर्मा, गया
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