तिरस्कृत और आश्रयहीन बच्चों को अब ममता की छांव ही नहीं, दादी-नानी का प्यार भी मिलेगा। प्रदेश सरकार की एक ही छत के नीचे बाल गृह और आश्रय स्थल की योजना पर महिला कल्याण विभाग का प्रयास जल्द ही रंग लाने वाला है। दुर्गाकुंड स्थित राजकीय वृद्धा आश्रम परिसर में तीन मंजिला थीम पार्क के भवन का निर्माण अंतिम चरण में है। इस माह के अंत तक भवन पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। जून से बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। थीम पार्क तैयार होने के बाद वहां बच्चे और महिलाएं एक साथ रहेंगे।
महिला कल्याण विभाग की देखरेख में बने रहे तीन मंजिला थीम पार्क पर 4.96 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बीते छह माह से निर्माण जारी है। 100 बच्चों की क्षमता वाले इस थीम पार्क से बच्चों और वृद्ध माताओं को एक ही परिसर में आवासित होने से पारिवारिक माहौल मिलेगा। वहीं, जो महिलाएं कभी अपने नाती-पोतों के प्यार से वंचित रह गई थीं। उन्हें इन बच्चों के जरिये जीवन में दोबारा जीने की आस मिल सकेगी। वहीं, अनाथ बच्चों को भी दादी-नानी का प्यार मिल सकेगा। वहीं, मुख्यधारा से विमुख हो चुकीं महिलाओं को भी जीने का सहारा मिलेगा।
पूर्वांचल का पहला गोद केंद्र
थीम पार्क शुरू होने के साथ ये पूर्वांचल का पहला गोद केंद्र (एडॉप्शन सेंटर) होगा। जहां दंपती बच्चों को गोद ले सकेंगे। 0-5 साल के बच्चे जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है या जो बच्चे चाइल्ड लाइन के माध्यम से पाए जाते हैं, उन्हें यहां रखा जाएगा। यहां खेलकूद की सुविधा भी होगी।
क्यों पड़ी जरूरत
योगी सरकार ने वाराणसी समेत विभिन्न जिलों में बेसहारा, आश्रयहीन व तिरस्कृत बच्चों व महिलाओं के लिए सरकारी व गौर सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित बालगृहों व महिला शरणालयों की संख्या में बढ़ोतरी की पहल की है। आगरा में 50 बच्चों की क्षमता वाले राजकीय बालगृह, मिर्जापुर एवं कानपुर में 100 किशोरों की क्षमता वाले एक-एक राजकीय संप्रेषण गृह बनाए जाएंगे।
नए एकीकृत भवन में शून्य से पांच साल तक के बेसहारा बच्चों के अलावा आश्रयहीन महिलाओं को रखा जाएगा। तीन मंजिला भवन इस माह के अंत तक तैयार हो जाएगा। अगले माह इसका लोकार्पण होना है। - देवशरण सिंह, अधीक्षक, राजकीय वृद्धाश्रम, दुर्गाकुंड