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Varanasi News: स्वर्ण पुष्पों से चमका मां कूष्मांडा का दरबार, शहनाई और बांसुरी की तान पर बही भक्ति की रसधार

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वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित मां कूष्मांडा मंदिर में तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को स्वर्ण पुष्पों से मां का शृंगार हुआ। मंदिर के गर्भगृह को सुगंधित फूलों से सजाया गया। मां को बनारसी साड़ी और गुड़हल के फूल अर्पित कर उनकी आरती उतारी गई। इस दौरान मां के स्वर्णिम आभा का दर्शन पाकर भक्त निहाल हो उठे। देर रात तक भक्तों के दर्शन पूजन का सिलसिला जारी रहा।
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कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर परिसर में कलाकार अदिति चटर्जी के कथक नृत्य से हुई। इसके बाद सायंकालीन सत्र में 21 युवा कलाकारों ने अपनी भजनों की सुर सरिता बहाई। जय जगबंदिनी विश्व विनोदिनी... भजन से मंदिर परिसर में माहौल भक्तिमय हो गया। सभी कलाकारों ने एक से बढ़कर एक देवी गीतों व भजनों की प्रस्तुति दी। रात में एक घंटे तक मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की आरती हुई। मां को 56 प्रकार के भोग अर्पित हुए। आरती के बाद देर रात तक भजन कीर्तन का सिलसिला चलता रहा। मंदिर परिसर में जय माता दी और हर-हर महादेव के उद्घोष गूंजते रहे। मंदिर में भजन कीर्तन के समय पांव रखने की भी जगह नहीं बची थी।
देर रात तक चले कार्यक्रम में मां दुर्गा को बैंजो, तबला, शहनाई, सैक्सोफोन और बांसुरी की धुन सुनाई गई। आयोजक बिंदु दूबे व मानसी दूबे तथा संयोजक विशेश्वर झा (सोनू महाराज) ने सभी कलाकारों व उपस्थित भक्तों का अभिनंदन किया। देर रात तक भक्तगण भजनों की स्वरलहरियों में झूमते रहे।
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आज मनोज तिवारी सुनाएंगे भजन
दुर्गा मंदिर में वार्षिक संगीतमयी शृंगार महोत्सव की तीसरी व अंतिम निशा बृहस्पतिवार को मंदिर में भरतनाट्यम नृत्य और स्थानीय कलाकारों के भजनों की प्रस्तुति होगी। रात 8 से 9 बजे आरती के बाद मुख्य सांसद मनोज तिवारी मृदुल भजन गाएंगे। इसके अलावा अन्य कलाकार भी भजनों की सुर सरिता बहाएंगे।
पं. गणेश प्रसाद मिश्र के शास्त्रीय गायन ने बांधा समां
दुर्गा मंदिर में आयोजित संगीत समारोह में शास्त्रीय गायक पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने राग बैरागी भैरव में देवी स्तुति व बड़ा ख्याल हे जोगिया मेरे द्वारे आए से शुभारंभ किया। उन्होंने देवी वंदना मां शारदे प्रस्तुत की। इसके बाद पारंपरिक कजरी तरसन जी आरा हमार व बदरिया घेरी आई ने बनारसी रंग घोला। तबले पर सिद्धांत मिश्र, बांसुरी पर डॉ. सनीश, सारंगी पर ओम मिश्र और सहगायन में शुभ व सुरांश ने उत्कृष्ट संगत की।
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