धधकती चिताओं के बीच नगरवधुओं की महफिल
- फोटो : अमर उजाला
सर्व प्रथम बाबा का भजन, दुर्गा दुर्गति नाशिनी..., डिमिग डिमिग डमरू कर बाजे..., डिम डिम तन दिन दिन तू ही तू जग का आधार तू..., ऊं नम: शिवाय..., खेले मसानै में होरी..., चैती लागा चुनरी में दाग छुड़ाऊं कैसे, घर जाऊं कैसे... के साथ ही दादरा, ठुमरी की प्रस्तुतियां दीं।