भूटान की राजमाता आशी दोरजी व्योमे वांग्चुक ने सारनाथ में दर्शन पूजन किया। विश्व शांति की कामना की।
राजमाता के साथ उनकी बेटी और नाती ने भी दर्शन पूजन किया।
गया स्थित तिब्बत मंदिर के प्रभारी भिक्षु लामा ईशे बौद्ध (तिब्बत निवासी) ने दावा किया है कि भूटान की राजमाता की बेटी सोनम देछेन वांग्चुक के चार साल के बेटे जिगमी जिगतेन वांग्चुक तिब्बत में धर्मगुरु वेरोचना के अवतार हैं।
उन्होंने बताया कि पुनर्जन्म की सारी बातें जिगमी जिगतेन वांग्चुक को याद हैं।
धर्मगुरु के बारे में भिक्षु लामा ईशे बौद्ध ने बताया कि 824 साल पहले तिब्बत में वेरोचना लोचावा रिंग पोंछे का जन्म हुए थे।
नालंदा में उन्होंने पढ़ाई की और बाद में धर्मगुरु हो गए। उन्होंने भगवान बुद्ध के उपदेशों का प्रचार प्रसार किया और कई क्षेत्रों का भ्रमण किया।
भिक्षु लामा ईशे बौद्ध ने बताया कि जिगमी जिगतेन को सब कुछ स्मरण है।
चौखंडी स्तूप में भी जिगमे ने बिछी चमकीली चादर पर परंपरागत तरीके से पूजा की। मंदिर आने से पूर्व भूटान की राजमाता ने कहा था कि वह अपने नाती के कहने पर ही सारनाथ दर्शन करने आई हैं।