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अयोध्या से पहले काशी पहुंचेगा एटा-जलेसर में तैयार हो रहा 11 क्विंटल का घंटा

Wed, 28 Nov 2018 10:15 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जलेसर (एटा)
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चुनावी माहौल हो और अयोध्या की बात न हो ऐसा कैसे संभव है। हर बार की तरह एक बार फिर अयोध्या चर्चा में है। इसके केंद्र में है राम मंदिर। यह सब हम इसलिए बता रहे हैं कि इस बार अयोध्या और राम मंदिर के साथ ही एटा का जलेसर भी चर्चा में है। वजह है यहां बनने वाले घंटे। दरअसल वाराणसी के कुछ लोगों ने जलेसर के एक उद्यमी  को 11 क्विंटल का घंटा बनाने का आर्डर दिया है।
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बताया जा रहा है यह घंटा अयोध्या में राम मंदिर पर चढ़ाया जाएगा। घंटा तैयार होने के बाद अयोध्या से पहले वाराणसी (काशी) जाएगा। इस घंटे को बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं।  मुख्य कारीगर दाऊदयाल ने कहा कि 11 क्विंटल का घंटा बनाने का मेरा पहला अनुभव है। अब से पहले मैं आठ क्विंटल का घंटा बना चुका है। खुशी इस बात की है कि घंटा के माध्यम से ही सही  वह भगवान राम के मंदिर का हिस्सा बन सकेगा।

कारीगर कंचीराम ने कहा कि अभी तक छोटे छोटे घंटे बहुत बनाए है। मगर पहली बार इतना भारी घंटा बनाने का मौका मिला है। हमारे हाथ का बना हुआ घंटा अयोध्या पहुंचेगा यह हमारे लिए खुशी की बात है।
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एटा-जलेसर की पहचान है घंटा

11 क्विंटल के घंटे का आर्डर पाने वाले उद्यमी व जलेसर नगर पंचायत के चेयरमैन विकास मित्तल ने बताया कि एटा और जलेसर की पहचान ही घंटे-घंटियों से है। जलेसर की ही मिट्टी ऐसी है, जहां घंटा बनता है। इसके अलावा पूरे देश में कहीं भी घंटा नहीं बनते हैं। अगर दूसरी जगह घंटा बनता है तो वहां जलेसर से ही मिट्टी जाती है। उन्होंने बताया कि अभी तक उन्होंने 800 किलो भार का घंटा बनाया है। 11 सौ किलो का घंटा पहली बार बना रहे हैं। यह घंटा बनारस के लोगों ने तैयार कराया है। वह इसे बनारस भेजेंगे, इसके बाद वहां से इस अयोध्या पहुंचाया जाएगा। 

घंटे की डाई बनाने में ही लगेगा एक माह 
11 क्विंटल के घंटे का आर्डर पहली बार किसी उद्यमी को मिला। इसे लेकर उद्यमी से लेकर कारीगर तक उत्साहित हैं। साथ ही घंटे को बनाकर तैयार करने की भी बेचैनी है। इस घंटे को तैयार कर रहे मुख्य कारीगर ने बताया कि घंटा बनाने के लिए डाई बनाने का काम शुरू कर दिया है। अभी तो घंटे की डाई और सांचा बनाने में ही लगभग एक माह लग जाएगा। इसके लिए तीन भट्टी तैयार की जा रहीं हैं। इसे बनाने में कम से कम एक दर्जन कारीगर लगेंगे। 
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