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दूध न देने वाली गायें करेंगी पशुपालकों को मालामाल

Sat, 27 Feb 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
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इसमें दुधारू के साथ गैर दुधारू गायों से बड़े रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम के तहत 25 हजार की आबादी पर एक क्लस्टर खोला जाएगा।  दूध, घी, छाछ, दही से तो लोग आमदनी करेंगे ही, बिना दूध देने वाली गायों के मूत्र और गोबर से अधिक लाभ कमा सकेंगे।
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इतना ही नहीं गोमूत्र से बिजली, जीवनरक्षक दवाएं बनाने के साथ ही गोबर से गैस और जैविक खाद के उत्पाद बाजार में उतारे जाएंगे। खास बात यह है कि इसके लिए ग्लोबल बाजार भी मुहैया कराया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्टार्टअप के हिस्सा के तौर पर इसकी जल्द ही यूपी में शुरुआत होगी। राष्ट्रीय गोरक्षा संघ ने पहली बार गोवंश की रक्षा के लिए उसकी उपयोगिता और महत्व को साबित करने के साथ ही रोजगारपरक कार्ययोजना तैयार की है।



पटना के संत जनार्दन देव ने इस कार्यक्रम को फिलहाल प्रयोग के तौर पर महाराष्ट्र और तेलंगाना के गांवों में शुरू किया है। गोवंश आधारित जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र के अमरावती, अकोल, वर्धा के अलावा तेलंगाना के बासर, निजामाबाद, खदेलावार और नांदेड़ में गो ग्राम की स्थापना की है। इसके तहत 25-50 हजार की आबादी पर एक क्लस्टर खोला गया है। इस क्लस्टर से गांव-गांव के पशुपालकों को जोड़ा जा रहा है।
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गो ग्राम में सुविधायुक्त गोशालाओं के अलावा काऊ हॉस्टल, पशु अस्पताल भी बनाए जा रहे हैं, ताकि गायों का उचित पालन और संरक्षण हो सके। इनमें खास तौर से देसी नस्ल की गायों को ही रखने की योजना है। गो रक्षा संघ के राष्ट्रीय मंत्री ध्रुव कुमार ने पूर्वांचल में गो ग्राम के तहत क्लस्टर की स्थापना के लिए सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। ध्रुव ने अमर उजाला को बताया कि पीएम मोदी के स्टार्ट अप से जुड़े इस कार्यक्रम के तहत देश भर में 100 क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वाराणसी, जौनपुर और सोनभद्र में जल्द ही क्लस्टर खोले जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक पशु पालक इससे जुड़कर फायदा उठा सकें।
 

राष्ट्रीय गोरक्षा संघ के मंत्री ध्रुव कुमार ने बताया कि बिना दूध वाली गायों से अधिक लाभ कमाने की योजना को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। गो मूत्र, गोबर के अर्क के अलावा पंचगव्य और अन्य जीवन रक्षक दवाएं तैयार कर उन उत्पादों का निर्यात किया जाएगा। लोग जानकारी के अभाव में उसके फायदे से वंचित रह जा रहे हैं।
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