वस्त्र उद्योग के विकास के लिए केंद्र कालीन नगरी भदोही में देश का पहला वस्त्र विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रही है। इस विश्वविद्यालय में वस्त्र तकनीक की नवीनतम तकनीक की पढ़ाई के साथ कपड़े की गुणवत्ता और डिजाइन बेहतर बनाने के साथ-साथ जीवाणु रहित और बॉडी फ्रेंडली कपड़ों पर शोध होगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से स्थापित होने वाले इस विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। भदोही स्थित भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) ने 23 एकड़ जमीन लेकर योजना पर काम भी शुरू कर दिया है।
भदोही सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने सोमवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शुरू हुए चार दिवसीय कार्पेट एक्सपो के उद्घाटन समारोह में यह जानकारी दी। बताया कि विश्वविद्यालय में वैश्विक बाजार में भारतीय वस्त्रों को अलग पहचान देने व मांग के अनुरूप विभिन्न प्रकार के वस्त्र निर्माण, डिजाइनिंग आदि के क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
कार्पेट एक्सपो में पहले दिन 210 विदेशी ग्राहक, 125 विदेशी ग्राहकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। भारत के विभिन्न प्रांतों से आए कालीन निर्माताओं के 309 स्टाल मेले में लगे हैं। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के अध्यक्ष कुलदीप राज वाटल ने बताया कि भारतीय हस्त निर्मित कालीन उद्योग विश्व बाजार में उत्पादन तथा निर्यात में दूसरे स्थान पर है। उद्योग में 20 लाख लोगों को, विशेषकर महिलाओं को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। बताया कि इस बार कालीन निर्यातकों ने तीन सौ करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा है।