चैत्र नवरात्रि में जगतजननी मां जगदंबा भक्तों पर आशीष बरसाएंगी। कोरोना संक्रमण के कारण पांच श्रद्धालुओं के प्रतिबंध के साथ मंदिरों में माता के दर्शन पूजन होंगे। काशी के धर्माचार्यों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वह कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें। 13 अप्रैल से शुरू हो रहे नवरात्रि की तैयारियां चल रही हैं।
देवी उपासिका मां साध्वी गीतांबा तीर्थ का कहना है कि संपूर्ण विश्व में कोरोना का भय है। इसके कारण मंदिरों में भक्तों को माता के दर्शन के दौरान बेहद सावधानी बरतनी होगी। घबराने या विचलित होने की जरूरत नहीं है। आप अपने घरों में पवित्र भाव से मां की आराधना करें मां प्रसन्न होंगी।
दुर्गा मंदिर के महंत कौशल पति द्विवेदी का कहना है कि कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार दर्शन पूजन का इंतजाम किया गया है। माता की आराधना में आडंबर की बजाय श्रद्धा ही प्रमुख है। इसलिए सभी भक्तों से अपील है कि वह व्यवस्था में सहयोग करें। भोजूबीर स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर के पुजारी राजू गिरी ने कहा कि शासन प्रशासन के निर्देशों के अनुसार दर्शन पूजन का इंतजाम किया गया है। भक्तों से अपील है कि वह इसमें सहयोग करें। मास्क लगाकर और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए दर्शन पूजन करें।
प्रथम दिन होंगे मुख निर्मालिका गौरी के दर्शन
नवरात्रि में नौ दिनों तक माता की आराधना व पूजा करने से माता का आशीर्वाद बना रहता है। देवी भागवत के अनुसार प्रथम दिन मां शैलपुत्री के दर्शन का विधान है और काशी में मुख निर्मालिका गौरी का। मां गीतांबा तीर्थ ने बताया कि नवरात्रि के प्रथम दिन तीन साल की कन्या की विधि-विधान से पूजा अर्चना कर उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर विदा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मनोकामना पूर्ति के लिए ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये विच्चै की एक माला का जप अवश्य करें। मां सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगी।
काशी की गलियों में स्थापित हैं मां गौरी के नौ मंदिर
वासंतिक नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का दर्शन-पूजन होता है। वहीं काशी में नौ गौरी के दर्शन-पूजन का विधान है। कोरोना संक्रमण के कारण पाबंदियों के साथ भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
नौ गौरी के मंदिर
मुख निर्मालिका गौरी
ज्येष्ठा गौरी
सौभाग्य गौरी
शृंगार गौरी
विशालाक्षी गौरी
ललिता गौरी
भवानी गौरी
मंगला गौरी
सिद्ध महालक्ष्मी गौरी
कैसे करें कलश स्थापना व पूजन
ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त 13 अप्रैल को सुबह 10:17 बजे तक है। कलश स्थापना के लिए कलश लोहे या स्टील का नहीं होना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पं. राहुल तिवारी के अनुसार कलश स्थापना के लिए पवित्र मिट्टी से वेदी का निर्माण करें। फिर उसमें जौ और गेहूं बोएं तथा उस पर यथाशक्ति मिट्टी, तांबे या सोने का कलश स्थापित करें। यदि विधिवत करना हो तो गणेशाम्बिका, वरुण, षोडशमातृका, सप्तघृत मातृका, नवग्रह आदि देवों का पूजन तथा पुण्याहवाचन ब्राह्मण द्वारा कराएं अथवा स्वयं करें। इसके बाद उसका षोडशोपचार पूजन करें। तदनन्तर श्रीदुर्गासप्तशती का संपुट अथवा साधारण पाठ भी करने की विधि है। पाठ की पूर्णाहुति के दिन दशांश हवन अथवा दशांश पाठ करना चाहिए।
कन्या पूजन
कुमारी पूजन नवरात्रि व्रत का अनिवार्य अंग है। कुमारिकाएं जगदजननी जगदंबा का प्रत्यक्ष विग्रह हैं। सामर्थ्य हो तो नौ दिन तक, अन्यथा सात, पांच, तीन या एक कन्या को देवी मानकर पूजा करके भोजन कराना चाहिए।
नवदुर्गा को करें अर्पित
प्रतिपदा - उड़द, हल्दी, माला-फूल
द्वितीया - तिल, शक्कर, चूड़ी, गुलाल शहद
तृतीया - लाल वस्त्र, शहद, खीर, काजल
चतुर्थ - दही, फल, सिंदूर, मसूर
पंचमी - दूध, मेवा, कमलपुष्प, बिंदी
षष्ठी - चुनरी, पताका, दूर्वा
सप्तमी - बताशा, इत्र, फल-पुष्प
अष्टमी - पूड़ी, पीली मिठाई, कमलगट्टा, चंदन, वस्त्र
नवमी - खीर, सुहाग सामग्री, साबुदाना, अक्षत फल, बताशा
दुर्गासप्तशती के पाठ का फल
दुर्गासप्तशती के एक पाठ से फलसिद्धि, तीन पाठ से उपद्रव शांति, पांच पाठ से सर्वशांति, सात पाठ से भय मुक्ति, नौ पाठ से यज्ञ के समान फल, 11 पाठ से राज्य की प्राप्ति, 12 पाठ से कार्यसिद्धि, 14 पाठ से वशीकरण, 15 पाठ से सुख-संपति, 16 पाठ से धन व पुत्र की प्राप्ति, 17 पाठ से राजभय व शत्रु रोग से मुक्ति, 20 पाठ से ग्रहदोष शांति और 25 पाठ से बंधन मुक्ति।
तैयारी शुरू देवी मंदिरों की सफाई में लगा अमला
चैत्र नवरात्रि शुरू होने के पहले देवी मंदिरों की साफ सफाई करने में नगर निगम के कर्मचारी लग गए हैं। मंदिरों के बाहर बैरिकेडिंग हो रही है। गर्भगृह से लेकर मंदिर परिक्षेत्र की धुलाई, रंगाई-पुताई जोरों से चल रही है। मंदिर में होने वाले भीड़भाड़ को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर की सफाई के साथ ही मंदिर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी गई। भदैनी स्थित नौ दुर्गा, महिषासुर मर्दिनी, कमच्छा स्थित कामाख्या देवी और दुर्गाकुंड बड़ी शीतला मंदिर की भी साफ-सफाई की जा रही है। नवरात्रि में सोशल डिस्टेंसिग के तहत मंदिर में भक्तों को प्रवेश मिलेगा।