बीएचयू में हुई शिक्षकों की नियुक्ति में एक के बाद एक गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। नया मामला विज्ञान संकाय के जूलॉजी डिपार्टमेंट का है। यहां एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति में अनियमितता सामने आई है। इसका खुलासा आरटीआई से हुआ है।
पता चला है कि नियुक्ति से पहले प्रमाणपत्रों, कागजातों का सत्यापन तक विश्वविद्यालय ने नहीं कराया। यह नियुक्तियां पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल की हैं।
आरटीआई से सामने आई जानकारी के मुताबिक जूलॉजी डिपार्टमेंट में जिस अभ्यर्थी की नियुक्ति एसोसिएट प्रोफेसर पर हुई है, उन्होंने आवेदन में दो शोध छात्रों को अपने अधीन शोध कराने का जिक्र किया था।
इस बारे में सिकरौल निवासी एक अधिवक्ता ने आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी तो विश्वविद्यालय ने 22 फरवरी 2018 को दिए जवाब में उनके द्वारा दो छात्रों को शोध कराए जाने की पुष्टि की थी।
अब जब महाराष्ट्र के उस कॉलेज से आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी गई, जहां दो छात्रों को शोध कराने का जिक्र आवेदक ने अपने आवेदन में किया था तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
15 मई को महाराष्ट्र के संबंधित कॉलेज के जनसंपर्क अधिकारी ने वहां असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत रहने के दौरान आवेदक के निर्देशन में किसी छात्र के शोध न करने की जानकारी दी है। ऐसे में पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।