नागरी नाट्य मंडली में हुए रविंद्रनाथ टैगोर के नाट्य चंडालिका का मंचन करते कलाकार । अमर उजाला
वाराणसी। नागरी नाटक मंडली न्यास के चार दिवसीय अश्विन नाट्य महोत्सव 2026 के दूसरे दिन सोमवार को गुरु रवींद्रनाथ टैगोर के नाटक चंडालिका का मंचन हुआ। नाट्य संस्था यथार्थ क्रिएशन ने डॉ. शुभ्रा वर्मा के निर्देशन में यह प्रस्तुति दी। प्रेक्षागृह में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय और निर्देशन की सराहना की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी, न्यास अध्यक्ष डॉ. संजय मेहता, सचिव डॉ. अजीत सैगल और निर्देशक डॉ. शुभ्रा वर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। डॉ. संजय मेहता ने कहा कि नागरी नाटक मंडली न्यास पिछले 30 वर्षों से काशी की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रख रहा है। न्यास स्थानीय नाट्य दलों को मंच और संसाधन उपलब्ध कराकर प्रतिभाओं को अवसर दे रहा है। उन्होंने चंडालिका को सामाजिक और मानवीय दृष्टि से प्रासंगिक बताया। मुख्य अतिथि राजेश त्रिवेदी ने कहा कि चंडालिका मानवीय गरिमा और समानता का दस्तावेज है। उन्होंने यथार्थ क्रिएशन के कलाकारों द्वारा आत्मसम्मान की खोज को मंच पर साकार करने की सराहना की।
त्रिवेदी ने नागरी नाटक मंडली न्यास के तीन दशकों के निस्वार्थ योगदान को महत्वपूर्ण बताया। न्यास के अध्यक्ष डॉ. संजय मेहता और सचिव डॉ. अजीत सैगल ने राजेश त्रिवेदी का स्वागत किया। डॉ. अजीत सैगल ने न्यास की गतिविधियों पर प्रकाश डाला और आभार व्यक्त किया। नाटक चंडालिका की मूल आत्मा प्रस्तुत की गई। इसमें अस्पृश्य प्रकृति और बौद्ध भिक्षु आनंद के प्रसंग को दर्शाया गया। कलाकारों ने सामाजिक विषमता, प्रेम, अहंकार और आध्यात्मिक चेतना के जागरण को जीवंत किया। नाटक का संगीत संयोजन, वस्त्र विन्यास और प्रकाश परिकल्पना कथानक को प्रभावी बना रहे थे। यथार्थ क्रिएशन के सभी पात्रों और तकनीकी सहयोगियों को भी स्मृति-चिह्न दिए गए। मुख्य अतिथि और न्यास के पदाधिकारियों ने यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर नगर के साहित्यकार, रंगकर्मी और नाट्य प्रेमी उपस्थित रहे।