संत प्रवर विज्ञान देव महाराज के अनुसार, शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर उमरहा में स्थित स्वर्वेद महामंदिर का निर्माण दिसंबर 2004 में शुरू हुआ था। ग्राउंड फ्लोर पर सद्गुरु सदाफल महाराज के आध्यात्मिक जीवन पर आधारित प्रदर्शनी व गुफा, सत्संग हॉल बनाया गया है। प्रथम तल पर स्वर्वेद प्रथम मंडल के दोहे एवं बाहरी दीवारों पर 28 प्रसंग जो वेद , उपनिषद ,गीता , महाभारत, रामायण की थीम लेकर बनाए गए हैं।
प्रथम तल से पांचवें तल तक आंतरिक दीवारों पर स्वर्वेद के दोहे एवं बाहरी दीवारों पर उपनिषद, गीता, रामायण के प्रेरक प्रसंग दर्शाए गए हैं। सातवें तल पर आधुनिक तकनीक से युक्त दो अत्याधुनिक ऑडिटोरियम हैं। इसमें साधक विहंगम योग के सैद्धांतिक व क्रियात्मक बोध का ज्ञान प्राप्त करेंगे। मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा परिपथ है और फौव्वारे लगाए गए हैं। बाहर वन्य जीवों हाथी, हिरन की प्रतिकृतियां गुलाबी सैंड स्टोन से बनाए गए हैं।
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महर्षि सदाफलदेव की अमूल्य कृति है स्वर्वेद
योगी सदगुरु महर्षि सदाफलदेव की अमूल्य कृति है स्वर्वेद। स्वरर्वेद का मतलब है आत्मा से ज्ञान की प्राप्ति। महर्षि सदाफल देव महाराज ने 17 सालों की साधना के बाद स्वर्वेद के ज्ञान को आम जनमानस को उपलब्ध कराया। हिमालय की कंदराओं में उन्होंने ग्रंथ स्वर्वेद को लिपिबद्ध किया। स्वर्वेद चेतन योग समाधि की अवस्था में प्राप्त प्रत्यक्ष आध्यात्मिक अनुभवों का संकलन है। इस ग्रंथ में अनुभूति एवं अभिव्यक्ति का अद्भुत सामंजस्य है। परमाणु से परमात्मा तक के समस्त ब्रह्म तत्व ज्ञान एवं अभ्यंतर भेद साधन को सरल हिंदी भाषा में दोहों के रूप में संजोकर स्वर्वेद ग्रंथ बनाया गया। स्वर्वेद ग्रंथ के पांच मंडल हैं।
स्वर्वेद से मिली स्वर्वेद महामंदिर की प्रेरणा
स्वर्वेद ग्रंथ से स्वर्वेद महामंदिर निर्माण की प्ररेणा मिली। आचार्य स्वतंत्र देव महाराज व उनके बेटे प्रवर संत विज्ञान देव महाराज ने इसकी स्थापना की और आज यह बनकर तैयार हो चुका है। मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर सदगुरू महर्षि सदाफलदेव महाराज की प्रतिमा का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 दिसंबर को मंदिर लोकार्पण के अवसर पर करेंगे।
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मंदिर की विशेषताएं
- 64 हजार स्क्वायर फीट में सात मंजिला मंदिर
- तीन लाख स्क्वायर फीट में गुलाबी सैंड स्टोन
- तीन लाख वर्गफीट में श्वेत मकराना संगमरमर
- मंदिर का कुल क्षेत्रफल है ढाई लाख वर्गफीट
- 80 हजार वर्गफीट पर हुआ है मंदिर का निर्माण
- 20 हजार साधक एक साथ कर सकेंगे साधना
- चार हजार स्वर्वेद के दोहों को दीवार पर किया गया है अंकित
- 180 फीट है सात मंजिला मंदिर की ऊंचाई
- 135 फीट ऊंची सदगुरुदेव ककी सैंडस्टोन की प्रतिमा होगी स्थापित
- सदाफल देव ने बनाया था प्रथम उत्तराधिकारी, चली आ रही है परंपरा
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सदगुरू सदाफलदेव महाराज ने अपने जीवन काल में ही अपने प्रथम परंपरा उत्तराधिकारी सद्गुरु अनंत आचार्य धर्मचंद्रदेव को स्वर्वेद का भाष्य करने का निर्देश दिया था। उन्होंने इसका प्रचार प्रसार किया। उनके पदचिन्हों पर सदगुरू आचार्य स्वतंत्र देव महाराज व संत प्रवर ने 2015 से अब तक स्वर्वेद का प्रचार प्रसार देश ही नहीं विदेश के 35 देशों तक किया। इसमें अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जापान, जर्मनी जैसे देश शामिल हैं।