वाराणसी के सीर गोबर्धन में तीन दिवसीय धर्म संसद के बाद बुधवार को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने धर्मादेश जारी किया। श्री विद्या मठ में जारी तीन पेज के धर्मादेश में अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए स्पीकर और सांसदों को प्रस्ताव भेजने का निर्णय सुनाया गया है। शंकराचार्य ने धर्मादेश के माध्यम से संविधान में संशोधन कराकर भी रामजन्म भूमि पर राम मंदिर बनाने की भी मांग रखी।
धर्मादेश में कहा गया है कि श्रीराम मंदिर बनाना जनता का फैसला है। इसलिए सर्वोच्च न्यायालय से इसे लोक हित और जनहित का मुद्दा मानते हुए चार सप्ताह में फैसला सुनाने का आग्रह किया जाएगा। शंकराचार्य ने कहा कि रामालय ट्रस्ट की ओर से हम भी सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर अनुरोध करेंगे कि वह पांच जजों की पीठ स्थापित कर श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए नियमित सुनवाई कर जल्द फैसला करेें। साथ ही सभी सांसदों और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर 11 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में चर्चा कराने का भी अनुरोध करेंगे।
शंकराचार्य ने कहा, श्रीराम मंदिर निर्माण की जगह सरकार उनकी प्रतिमा सरयू नदी के किनारे बनाने जा रही है। राम मंदिर का निर्माण चारों शंकराचार्यों और 13 अखाड़ों के प्रमुखों के साथ ही साधु-संतों के प्रयास से बनाया जाए।