जबकि वादी पक्ष के 12 वकील अंदर मौजूद थे। उन्होंने न्यायालय में कहा कि शृंगार गौरी और ज्ञानवापी मस्जिद अलग-अलग है। ऐसे में मस्जिद के अंदर वीडियोग्राफी का कोई औचित्य नहीं है। वादी पक्ष ने इस आवेदन पर विपक्षी गणों पर न्यायालय के कार्य में बाधा डालने और जिला प्रशासन पर कोर्ट के आदेश के अनुपालन में रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया।
डीजीसी सिविल महेंद्र पांडेय ने अपने जवाब में कहा कि प्रशासन कमीशन की कार्यवाही का प्रबल सहयोग कर रहा है। न्यायालय के आदेश को अमल कराने के लिए जिला प्रशासन तैयार है। अदालती कार्यवाही के दौरान पक्षकार इस बात से सहमत दिखे कि अगर अदालत चाहे तो खुद अपनी देखरेख में कमीशन की कार्यवाही संपादित कराए। अदालत ने लगभग दो घंटे तक चली बहस को सुनने के बाद मंगलवार को फिर सुनवाई की तिथि नियत कर दी।