वाराणसी में मेट्रो के साथ अब मोनो रेल चलाने की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके लिए सर्वे करने आई राइट्स की टीम मेट्रो के साथ-साथ मोनो रेल रूट की डीपीआर भी तैयार कर रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि प्राचीन बसावट वाले इस शहर में यदि मेट्रो के संचालन के लिहाज से फिजिबिलिटी नहीं मिली तो मोनो रेल के विकल्प पर काम शुरू कराया जाए।
राइट्स की टीम इसके मद्देनजर अब तक शहर के कई इलाकों में सर्वे कर चुकी है। फिलहाल दो रूट चिह्ति किए जा रहे हैं। मार्च के अंतिम सप्ताह तक रिपोर्ट तैयार करके केंद्र को भेजी जा सकती है।
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काशी में मेट्रो चलाने के लिए पहले कराए गए सर्वे में बीएचयू से लेकर भेल तक और बेनियाबाग से लेकर सारनाथ तक दो रूट तय किए गए थे। अब दोबारा सर्वे में इन दोनों रूटों पर करीब 29 किमी लंबी मेट्रो रेल लाइन के लिए संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
इस योजना पर करीब 17 हजार करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना है। वीडीए ने दोबारा सर्वे के लिए रेल मंत्रालय की तकनीकी संस्था राइट्स को 81 लाख रुपए दिए हैं। दरअसल, काशी शहर घनी आबादी और गलियों का शहर है।
ऐसे में मेट्रो चलाने के लिए बहुत लंबा रूट मैप तैयार करना पड़ रहा है और मिट्टी की जांच सहित अन्य सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही यहां इसकी अनुमति मिल सकती है। जबकि, मोनो रेल दो तीन डिब्बों की होती है और यह खंभों के सहारे आसानी से शहर में दौड़ाई जा सकती है।
इसमें मेट्रो के मुकाबले खर्च भी कम आता है और कम स्थान में यह ट्रेन टर्न भी कर सकती है। इसलिए मेट्रो से अधिक मोेनो रेल की संभावनाएं बताई जा रही हैं।
वीडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि मेट्रो के साथ अब मोनो रेल की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। प्राचीन बसावट वाले शहर में यह अधिक उपयुक्त साबित हो सकती है। राइट्स की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इस पर पहल आगे बढ़ाई जाएगी।