वाराणसी। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में बादल फटने और मूसलधार बारिश होने के बाद गंगा के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने भी 24-25 को पूर्वांचल में भारी बारिश की चेतावनी दी है। ऐसे में सहायक नदियों, पहाड़ी नालों से गंगा -वरुणा में आने वाली जलराशि तटीय बस्तियों के मुसीबत साबित हो सकती है। हालांकि जानकारों का अनुमान है कि अभी एमपी के बरसाती पानी को चंबल, बेतवा और क्षिप्रा के जरिए गंगा में आने में हफ्ते भर से अधिक लगेंगे। कहा जा रहा है कि निचले स्तरों के लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर नहीं पहुंचे तो उन्हें बर्बादी का सामना करना पड़ सकता है।
वाराणसी में गंगा की लंबाई करीब 30 किमी और वरुणा की 25 किमी तक है। दोनों नदियों के किनारे छोटी-छोटी ऐसी बस्तियां हैं, जहां किसानों और पशु पालकों की अधिकता है। ऐसे में अगर इस बारिश से बाढ़ आई तो खेतों में जल भराव से सब्जियों की खेती प्रभावित होगी और रास्ते बंद होने से दूध की आपूर्ति भी शहर के लिए बाधित हो जाएगी। दूध उत्पादक ढाब क्षेत्र अभी से गंगा के सोता के पानी से घिर गया है। वहां की करीब 40 हजार की आबादी अब नावों से शहर के लिए रुख कर पा रही है। दूध की बिक्री के लिए
बल्टहरों को परेशान होना बड़ रहा है और बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कतें हो रही हैं। सोता के मोकलपुर, गोबरहा, रमचंदीपुर, रामपुर के लोग फिलहाल बाढ़ के संकट से जूझने लगे हैं। सराय मोहाना में भी लकड़ी का पुल टूट जाने से अब बस्ती के लोग नाव से ही शहर आ-जा रहे हैं। अस्सी से राजघाट के बीच अभी जलस्तर खतरे के निशान से करीब नौ मीटर नीचे है लेकिन गंगा के पाट पकड़ने से लोग चिंतित हैं और गृहस्थी सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे हैं। नगवा, सामने घाट, मलहिया टोला, मदरवा, रमना के अलावा कैथी,
चंद्रावती, गौरा, उपरवार, तरनापुर, सरसौल में अभी हफ्ते भर तो बाढ़ जैसी नौबत नहीं आएगी लेकिन लोग बढ़ाव को लेकर परेशान हैं। वरुणा कपसेठी के सवारा गांव में वाराणसी की सीमा में प्रवेश करती है। इस जगह बसुही और मोरवा दो अन्य नदियां भी वरुणा में मिलती हैं। सरावा से सराय मोहना के बीच दोनों किनारों पर बस्तियां हैं और सब्जियों के अलावा बाजरा, उड़द, मूंग की खेती होती है। करीब पांच मीटर पानी और बढ़ा तो गौरहा, कालिका, परामेश्वर, परसीपुर, भुइली, सत्तनपुर, जगापट्टी में सब्जियों और अन्य फसलों को खतरा
पैदा हो जाएगा। सबसे बड़ा संकट शहर से लगे वरुणा किनारे के कोनिया, नक्की घाट, शैलपुत्री, सरैया, मीरा घाट इलाकों पर आएगा। यहां 20 हजार से अधिक परिवारों की गृहस्थी पानी में डूबने का खतरा है। फिलहाल मध्यप्रदेश में हुई बारिश का पानी चंबल, बेतवा और क्षिप्रा से यमुना में होते हुए गंगा में आएगा। केंद्रीय जल आयोग के अधीक्षण अभियंता अनुपम प्रसाद के अनुसार इस पानी के आने में हफ्ते भर से अधिक वक्त लगेगा। दो दिन के भीतर अगर तेज बारिश हुई तो बाढ़ से तटीय बस्तियां प्रभावित हो जाएंगी।