दोपहर में जब लौटा तो कमरे का दरवाजा खटखटाने के बाद भी नहीं खुला। आसपास के लोगों ने किसी तरह दरवाजा खुलवाया तो पलक पंखे की कुंडी में दुपट्टे से लटकी हुई थी। भाई मयंक यह देखते ही चीखने चिल्लाने लगा। मकान मालिक और गांव के प्रधान मनोज यादव ने तुरंत थानाध्यक्ष राजेश त्रिपाठी को सूचना दी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने फारेंसिक टीम संग छानबीन की और वीडियोग्राफी कराते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भिजवाया। पिता श्रीराम बरनवाल ने आरोप लगाया कि ससुराल और पति की प्रताड़ना से परेशान होकर बेटी ने खुदकुशी की। दहेज में 20 लाख नगद, एसयूवी गाड़ी के लिए दबाव बनाया जाता था।
इसकी शिकायत उसने पुलिस से की थी। 23 मार्च की रात में पति नायब तहसीलदार सत्य कुमार ने बेटी को फोन पर धमकी दी कि यदि 20 लाख नकद और चार पहिया गाड़ी नहीं मिली तो समझ लेना। रात में ही बेटी ने फोन पर यह बात बताई थी।
इसी सदमे में बेटी ने खुदकुशी कर ली। थानाध्यक्ष राजेश त्रिपाठी ने बताया कि पति सत्य कुमार बरनवाल, ससुर राघव राम, जेठ विक्रम बरनवाल, देवर सर्वेश बरनवाल, सास, देवरानी, ननद के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज किया गया है।