राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि देश में ऐसी कोई ताकत नहीं है, जो राम मंदिर का निर्माण रोक सके। उत्तर से लेकर दक्षिण तक भगवान राम को पूजा जाता है। भगवान राम हमारे राष्ट्रीय प्रतीक हैं।
बीएचयू में शनिवार को ‘श्रीराम जन्मभूमि मंदिर: स्थिति एवं संभावनाएं’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में डॉ. स्वामी ने कहा कि देश में 600 साल मुसलमानों ने राज किया। इसके बाद 200 साल अंग्रेज रहे। बावजूद इसके देश में 82 प्रतिशत हिंदू हैं। हिंदू स्वाभिमान कायम है।
महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह ने हिंदुओं के स्वाभिमान के लिए अंतिम दम तक संघर्ष किया। अब हिंदू समाज अपने अस्तित्व और अस्मिता के प्रतीक राम का मंदिर बनाने के लिए रिवर्स गेयर लगा रहे हैं। बार-बार 1992 में मस्जिद तोड़ने की बात कही जाती है, जबकि सच्चाई यह है कि नया मंदिर बनाने के लिए हिंदुओं ने पुराने मंदिर को तोड़ा था।
अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ की ओर से विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष अशोक सिंघल की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर पीठ के अध्यक्ष डॉ. स्वामी ने कहा कि मैंने पूजा के मूलभूत अधिकार धारा 25 के तहत याचिका दायर की है। सुनवाई होने पर 10 दिन में फैसला आ जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि पंचायत नहीं, कानून के आधार पर मंदिर चाहिए। जांच में पता चल चुका है कि जमीन के नीचे मंदिर के अवशेष हैं। 8500 पृष्ठों का निर्णय है।
इसलिए पूरा स्थान ज्यों का त्यों चाहिए। आजादी के बाद शहर, सड़क, पार्क, जीटी रोड के नाम बदले गए। अब गुलामी की एक-एक निशानी मिटानी है। 25 नवंबर को सभी हिंदू संगठन अयोध्या की धर्मसभा में जुटेंगे।