वहीं दरोगा के तीनों भाई प्रदीप कुमार, अतुल कुमार और अनिल कुमार भी घर आ गए थे। दरोगा की बूढ़ी मां विद्या देवी की हालत बेसुधों जैसी थी। वह बार-बार यही कह रही थी कि मोर करेजा तू ई का कइला हो...? परिजन बड़ी ही मुश्किल से वृद्धा को संभाले हुए थे और ढांढस बधा रहे थे।
उधर, दरोगा के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा था। 1987 में सिपाही के पद पर भर्ती हुए निर्मल चौधरी को दो पदोन्नति मिली। पहली पदोन्नति में हेड कांस्टेबल हुए और दूसरी में दरोगा के पद पर तैनात हुए। बंथरा थाने में उनकी तैनाती 2019 में हुई थी।
घर का लोन माफ कर दीजिएगा
मुख्यमंत्री को संबोधित सुसाइड नोट में निर्मल ने लिखा था कि तबीयत खराब है ठीक नहीं हो पाएंगे। मुख्यमंत्री निवेदन है कि मेरे बच्चों का घर लोन पर है। माफ कर दीजिएगा। नहीं तो बच्चे अनाथ हो आएंगे। सरकार आप बच्चों को नौकरी जरूर दीजिएगा अब आपके सहारे छोड़कर जा रहा हूं। मुझे माफ कीजिएगा।