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दरोगा आत्महत्या केस: निर्मल चौबे के शव की मणिकर्णिका घाट पर हुई अंत्येष्टि, घर-गांव का माहौल गमगीन

Fri, 05 Mar 2021 11:46 PM IST
हरि User अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
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दरोगा निर्मल कुमार चौबे का फाइल फोटो
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लखनऊ में विधान भवन के गेट नंबर-7 के सामने बृहस्पतिवार को पार्किंग में ड्यूटी दे रहे दरोगा निर्मल कुमार चौबे (53) ने खुद को गोली से उड़ा दिया था। दरोगा का शव शुक्रवार को वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र स्थित पलहीपट्टी घर पहुंचा तो गांव का माहौल गमगीन हो गया।

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परिजन दरोगा के दोनों बच्चों और उनकी बूढ़ी मां को बड़ी ही मुश्किल से संभाले थे। वहीं, मणिकर्णिका घाट पर जब दरोगा निर्मल के शव को उनके बड़े बेटे विकास ने मुखाग्नि दी तो उसका बिलखना देख मौजूद परिजनों और ग्रामीणों की आंखें भी डबडबा उठीं।

लखनऊ में बृहस्पतिवार की दोपहर ड्यूटी के दौरान दरोगा निर्मल कुमार चौबे ने गोली मार कर जान दे दी थी। दरोगा ने आत्महत्या के पीछे की वजह सुसाइड नोट में अपनी बीमारी को बताया था। शुक्रवार को दरोगा के दोनों बेटे और परिवार के अन्य लोग शव लेकर पलहीपट्टी स्थित घर पहुंचे।

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वहीं दरोगा के तीनों भाई प्रदीप कुमार, अतुल कुमार और अनिल कुमार भी घर आ गए थे। दरोगा की बूढ़ी मां विद्या देवी की हालत बेसुधों जैसी थी। वह बार-बार यही कह रही थी कि मोर करेजा तू ई का कइला हो...? परिजन बड़ी ही मुश्किल से वृद्धा को संभाले हुए थे और ढांढस बधा रहे थे।

उधर, दरोगा के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा था। 1987 में सिपाही के पद पर भर्ती हुए निर्मल चौधरी को दो पदोन्नति मिली। पहली पदोन्नति में हेड कांस्टेबल हुए और दूसरी में दरोगा के पद पर तैनात हुए। बंथरा थाने में उनकी तैनाती 2019 में हुई थी। 

घर का लोन माफ कर दीजिएगा 
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मुख्यमंत्री को संबोधित सुसाइड नोट में निर्मल ने लिखा था कि तबीयत खराब है ठीक नहीं हो पाएंगे। मुख्यमंत्री निवेदन है कि मेरे बच्चों का घर लोन पर है। माफ कर दीजिएगा। नहीं तो बच्चे अनाथ हो आएंगे। सरकार आप बच्चों को नौकरी जरूर दीजिएगा अब आपके सहारे छोड़कर जा रहा हूं। मुझे माफ कीजिएगा। 
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