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वैदिक गणित से चुटकियों में हल होंगे सवाल, नए सत्र से पाठ्यक्रम में होगी शामिल

Tue, 16 Mar 2021 12:43 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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शिक्षिका सरिता अग्रवाल। - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के परिषदीय स्कूलों में पहली बार वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। बच्चों में गणित का भय कम करने के लिए उन्हें सरल सूत्रों के जरिए गणित पढ़ाने की तैयारी की जा रही है, इससे बच्चे सेकंडों में सवाल हल कर सकेंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद प्रचलित गणित में ही वैदिक गणित के कुछ पाठ्यक्रम लागू करने जा रहा है। इसके लिए शिक्षकों को फिंगर मैथमेटिक्स, अबेकस समेत कई सरल विधियों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। नए शैक्षिक सत्र से जिले के 1144 स्कूलों में एक लाख 96 हजार बच्चे वैदिक गणित पढ़ेंगे। 

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आठवीं तक के बच्चों को जोड़, घटाना, गुणा, भाग के सवालों को हल करने में दिक्कतें आ रही हैं। शिक्षाविदों की माने तो वर्तमान में बच्चों में गणित पढ़ने के प्रति रुचि पैदा करने व गणित का भय दूर करने के लिए यह पहल की जा रही है। वैदिक गणित से बच्चों की न केवल गणितीय प्रतिभा विकसित होगी, बल्कि उनकी रुचि भी बढ़ेगी। 

क्या है वैदिक गणित
वैदिक गणित की शिक्षिका सरिता अग्रवाल बताती हैं कि साधारण गणित में हमें नियमों के अनुसार सवालों को हल करना होता है। वैदिक गणित अंक गणितीय गणना की वैकल्पिक एवं संक्षिप्त विधियों का समूह है। इसमें 16 मूल सूत्र दिए गए हैं। वैदिक गणित गणना की ऐसी पद्धति है, जिससे जटिल अंक गणितीय गणनाएं अत्यंत सरल, सहज व त्वरित संभव है।
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उदाहरण देखें

उदाहरण के तौर पर मान लें कि हमें 998 में 889 का गुणा करना है। प्रचलित विधि में इसमें समय लगेगा। लेकिन वैदिक गणित में दोनों का सबसे नजदीकी पूर्णांक एक हजार है। उन्हें एक हजार में से घटाने पर मिले 2 और 111 अंक। इन दोनों का गुण करेंगे तो मिलेंगे 222 अंक। अपने मन में इसे दाईं ओर लिखें। अब 889 में से उस दो को घटा दें। मिला 887 अंक। इसे मन में 222 के पहले लिखें। यहीं, यानी 887222 सही गुणनफल है।

ऐसे होगी पढ़ाई
फिंगर मैथमेटिक्स : इसके जरिए बच्चे अंगुलियों से 99 तक के जोड़ और घटाना कर सकेंगे। 
अबेकस- ऐसी पद्धति है, जिसमें एक उपकरण के जरिए जोड़ घटाना सेकंडों में किया जा सकता है।
वैदिक गणित- दो अंक की संख्या का दो अंक की संख्या से गुणा करके, संख्याओं का जोड़ जैसे 1 से 10 तक की संख्याओं को योग और 21 से 100 तक की संख्याओं की योग, चंद सेकंडों में करने के सूत्र पढ़ेंगे।
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बच्चों में गणित की प्रतिभा बढ़ाने के लिए वैदिक गणित के कुछ पाठ्यक्रम लागू करने की कार्ययोजना बना रहा है। इससे उनके मन से गणित को लेकर जो भय है वो दूर हो सकता है।- राकेश सिंह, बीएसए

पढ़ाई के साथ मूवी और गानों का आनंद लेंगे बच्चे
वाराणसी। कोरोना काल के बाद शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में परिषदीय स्कूलों के बच्चे गिनती और वर्णमाला के साथ ही मूवी और गानों का आनंद लेते हुए भी दिखेंगे। इतना ही नहीं स्कूल के बच्चे फिल्म देखने और गाने सुनने के साथ ही अपना अखबार भी निकाल सकेंगे। बच्चों को पढ़ाई के प्रति आकर्षित करने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद कुछ ऐसी ही तैयारियां कर रहा है। कोरोना के कारण बच्चे घर में रहने के कारण पढ़ाई से जी चुराने लगे हैं। बच्चों को आकर्षित करने के लिए नई- नई गतिविधियां कराने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसके जरिए विभाग की कोशिश है कि बच्चे पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी शामिल रहें, जिससे स्कूल उनके लिए हौव्वा न साबित हो।

बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या बच्चों की गैरहाजिरी है। विभाग की ओर से स्कूल चलो अभियान के बाद भी कई बच्चे स्कू ल आने में रुचि नहीं लेते, इस स्थिति में सुधार के लिए विभाग की ओर से यह पहल की जा रही है। स्कूल आने के प्रति रुचि पैदा करने के लिए बच्चों को पढ़ाई के साथ ही खेलकूद, सामाजिक विषयों व बाल फिल्में दिखाने जैसी गतिविधियां भी कराई जाएंगी। इन गतिविधियों के लिए सप्ताह में एक दिन नो बैग डे निर्धारित किया जाएगा। वहीं, जनपद का शैक्षिक कैलेंडर मार्च के आखिरी तक जारी कर दिया जाएगा।
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