उदाहरण के तौर पर मान लें कि हमें 998 में 889 का गुणा करना है। प्रचलित विधि में इसमें समय लगेगा। लेकिन वैदिक गणित में दोनों का सबसे नजदीकी पूर्णांक एक हजार है। उन्हें एक हजार में से घटाने पर मिले 2 और 111 अंक। इन दोनों का गुण करेंगे तो मिलेंगे 222 अंक। अपने मन में इसे दाईं ओर लिखें। अब 889 में से उस दो को घटा दें। मिला 887 अंक। इसे मन में 222 के पहले लिखें। यहीं, यानी 887222 सही गुणनफल है।
ऐसे होगी पढ़ाई
फिंगर मैथमेटिक्स : इसके जरिए बच्चे अंगुलियों से 99 तक के जोड़ और घटाना कर सकेंगे।
अबेकस- ऐसी पद्धति है, जिसमें एक उपकरण के जरिए जोड़ घटाना सेकंडों में किया जा सकता है।
वैदिक गणित- दो अंक की संख्या का दो अंक की संख्या से गुणा करके, संख्याओं का जोड़ जैसे 1 से 10 तक की संख्याओं को योग और 21 से 100 तक की संख्याओं की योग, चंद सेकंडों में करने के सूत्र पढ़ेंगे।
बच्चों में गणित की प्रतिभा बढ़ाने के लिए वैदिक गणित के कुछ पाठ्यक्रम लागू करने की कार्ययोजना बना रहा है। इससे उनके मन से गणित को लेकर जो भय है वो दूर हो सकता है।- राकेश सिंह, बीएसए
पढ़ाई के साथ मूवी और गानों का आनंद लेंगे बच्चे
वाराणसी। कोरोना काल के बाद शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में परिषदीय स्कूलों के बच्चे गिनती और वर्णमाला के साथ ही मूवी और गानों का आनंद लेते हुए भी दिखेंगे। इतना ही नहीं स्कूल के बच्चे फिल्म देखने और गाने सुनने के साथ ही अपना अखबार भी निकाल सकेंगे। बच्चों को पढ़ाई के प्रति आकर्षित करने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद कुछ ऐसी ही तैयारियां कर रहा है। कोरोना के कारण बच्चे घर में रहने के कारण पढ़ाई से जी चुराने लगे हैं। बच्चों को आकर्षित करने के लिए नई- नई गतिविधियां कराने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसके जरिए विभाग की कोशिश है कि बच्चे पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी शामिल रहें, जिससे स्कूल उनके लिए हौव्वा न साबित हो।
बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या बच्चों की गैरहाजिरी है। विभाग की ओर से स्कूल चलो अभियान के बाद भी कई बच्चे स्कू ल आने में रुचि नहीं लेते, इस स्थिति में सुधार के लिए विभाग की ओर से यह पहल की जा रही है। स्कूल आने के प्रति रुचि पैदा करने के लिए बच्चों को पढ़ाई के साथ ही खेलकूद, सामाजिक विषयों व बाल फिल्में दिखाने जैसी गतिविधियां भी कराई जाएंगी। इन गतिविधियों के लिए सप्ताह में एक दिन नो बैग डे निर्धारित किया जाएगा। वहीं, जनपद का शैक्षिक कैलेंडर मार्च के आखिरी तक जारी कर दिया जाएगा।