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पाठ्यक्रम के बाहर से प्रश्न पूछे जाने पर परीक्षार्थी परेशान

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परिषदीय विद्यालयों में बृहस्पतिवार को तीसरे दिन भी वार्षिक परीक्षा में लापरवाही और गड़बड़ियां मिलीं। प्रश्नपत्र कम पहुंचने से कई विद्यालयों के परीक्षार्थियों को दूसरी पाली की परीक्षा में फोटो स्टेट का सहारा लेना पड़ा। कक्षा छह से आठ के तक के प्रश्न कठिन थे। वहीं, कक्षा पांच और चार के विद्यार्थियों से ऐसे प्रश्न पत्र पूछे गए जो पाठ्यक्रम में ही नहीं थे। जिले में 1140 परिषदीय विद्यालयों में कक्षा दो से आठ तक के सवा लाख के करीब बच्चों ने हिंदी, अंग्रेजी और सामाजिक विषय की परीक्षा दी।
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एक विद्यालय के अध्यापक ने बताया कि परीक्षा में बच्चों की उपस्थिति कम होने के बाद भी प्रश्नपत्र कम आ रहे हैं। सुबह की पाली में बच्चों को प्रश्न बोलकर लिखाना पड़ रहा है जबकि दूसरी पाली में फोटो स्टेट कराकर परीक्षा पूरी कराई जा रही है। एक अध्यापक ने बताया कि कक्षा चार और पांच की परीक्षा में महर्षि दयानंद सरस्वती ने किसकी स्थापना की, कृष्ण देव राय किस भाषा के विद्वान थे, अरुणाचल का अर्थ क्या है जैसे कई प्रश्न ऐसे थे जो पाठ्यक्रम में नहीं है। एक विद्यालय के परीक्षक के बताया कि पढ़ाई के बाद प्रत्येक शनिवार को क्विज प्रतियोगिता होती थी जिनमें पूछे गए कई प्रश्नों को परीक्षा में शामिल किया गया है। इससे परीक्षार्थियों को परेशानी हुई। इस दौरान कुल 10 से 15 छात्र अनुपस्थित थे।
प्रश्नपत्रों के कमी की समस्या है। आगे की परीक्षाओं में इसमें सुधार कर लिया जाएगा। परीक्षा में पूछे गए प्रश्न पाठ्यक्रम से ही है। जिसे घुमाकर पूछा गया है। - राकेश सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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