बीएचयू में 21वीं सदी के शैक्षिक सुधारों पर सोमवार को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 125वीं जयंती पर आयोजित सम्मेलन में आए बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने विद्यार्थियों को तकनीकी, जलवायु परिवर्तन और भ्रामक सूचना चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को राष्ट्र के भविष्य निर्माण वाला रणनीतिक संस्थान माना जाना चाहिए। ये विकसित भारत 2047 के लिए शैक्षिक सुधारों में राष्ट्रीय प्राथमिकता पर हैं। शिक्षा का लक्ष्य सिर्फ डिग्री नहीं बल्कि रोजगार के साथ विश्लेषणात्मक सोच, चरित्र और उत्तरदायी नागरिक भी बनना है।
मालवीय मूल्य अनुशीलन सभागार में आयोजित सम्मेलन में यूनेस्को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक ओबिजियोफोर अगिनम ने विषय-केंद्रित शिक्षण से हटकर शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने एआई और सामाजिक असमानताओं जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान लिए विद्यार्थियों को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य करुणा, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों से युक्त नागरिक तैयार करना है।
विश्वविद्यालयों की भूमिका और भविष्य की दिशा
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि एआई और तेज तकनीकी प्रगति में यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को 21वीं सदी की जरूरतों के आधार पर शिक्षण पद्धति और कोर्स की समीक्षा करने को कहा। विश्वास व्यक्त किया कि बीएचयू अपनी समृद्ध विरासत के बल पर अग्रणी भूमिका निभा सकता है। मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च के समन्वयक मनोज कुमार मिश्र ने कहा कि चर्चाएं शांति, संवाद और समावेशिता पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगी। यूनेस्को चेयर फॉर पीस एंड इंटरकल्चरल अंडरस्टैंडिंग और मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च ने शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से इसे कराया।