सत्र समाप्त होने के एक घंटे के भीतर ही विश्वविद्यालय के आइसा और एसएफआई संगठन के सैकड़ों छात्रों ने हाथों में बैनर लहराते हुए नारे लगाते हुए नीरजा माधव की कार को घेर लिया और उनसे माफी मांगने की जिद करने लगे। नीरजा माधव ने कार से निकलकर उनकी इस मांग का प्रतिरोध किया और कहा कि जब मैंने कोई गलत बात कही ही नहीं तो फिर किस बात के लिए माफी?
यह तो संभव ही नहीं है कि मैं माफी मांगू। मैंने जो भी बातें कही हैं, वह सत्य कहीं हैं। आपकी असहमति हो सकती है। इस पर छात्र उग्र होकर मोदी विरोधी, संघ विरोधी और मनुस्मृति विरोधी नारे लगाने लगे। 15-20 मिनट के अंदर वहां विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में आए और नीरजा माधव की कार को सुरक्षित निकलवाया।
यह भी ज्ञातव्य है कि हैदराबाद विश्वविद्यालय में आज तक किसी भी भारतीय संस्कृति के लेखक या वक्ता को इस वामपंथी विचारधारा के लोगों ने मंच से कुछ बोलने नहीं दिया है। यह पहला अवसर था जब नीरजा माधव ने वहां मंच से आइसा और एसएफआई के छात्रों के बीच भी भारतीय संस्कृति की बातें पुरजोर ढंग से रखीं।