22 अगस्त को सियुर स्थित प्राथमिक विद्यालय पर बच्चों को रोटी-नमक खिलाने का प्रकरण उजागर हुआ। काफी हो-हल्ला मचने पर जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने घटना के दो दिन बाद जांच के लिए एडीएम और एसडीएम चुनार को स्कूल भेजा था। इस दौरान घटना की पुष्टि होते ही जिलाधिकारी भी सीडीओ के साथ विद्यालय पहुंच गए।
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विद्यालय में छानबीन के दौरान तमाम कमियां उजागर हुईं। इसे जिलाधिकारी ने सार्वजनिक रूप से बताया भी है, उन्होंने यह भी कहा कि रोटी-नमक की घटना की जब जांच की गई तो कक्षा एक से पांच तक के बच्चों ने रोटी-नमक की घटना को सही बताया।
इस दौरान बच्चों ने यह भी कहा कि रोटी-नमक खिलाने से एक दिन पहले बच्चों को खिचड़ी की जगह चावल-नमक खिलाने का भी मामला संज्ञान में आया है। जिसका खुलासा जिला प्रशासन ने किया था। जांच के दौरान स्कूली बच्चों के अभिभावकों के भी बयान दर्ज किए गए हैं।
रोटी-नमक और चावल-नमक खिलाने के प्रकरण को लेकर जिला प्रशासन ने इसे संगीन अपराध की श्रेणी में बताया लेकिन आज दामन बचाने की जुगत मे नैतिकता हाशिए पर चली गई। बुधवार को मामले ने नया मोड़ उस समय ले लिया जब महिला रसोइया रुक्मणि देवी ने अपना विडियो जारी कर बयान दिया कि यह कोई एक वाक्या नहीं है। इसके पहले भी नमक-चावल भी खिलाया गया है। इस विडियो के वायरल होने पर जांच की निष्पक्षता ही संदिग्ध हो गई है।