संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 19 दिसंबर को आयोजित होने वाले 32वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। इसमें शामिल होने वाले विद्यार्थी अबकी अपना दीक्षांत परिधान घर ले जा सकेंगे। पिछले साल गाउन को लेकर मचे बवाल के बाद इस बार पहले ही परिधान तय कर दिया गया है। छात्रों के लिए धोती-कुर्ता जबकि छात्राओं के लिए क्रीम कलर की साड़ी निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें दीक्षांत परिधान के तौर पर विश्वविद्यालय का लोगो लगी टोपी और उत्तरीय दिया जाएगा, जो उन्हें वापस नहीं करना पड़ेगा। अब तक गाउन का वितरण होता था जो समारोह के बाद वापस करना पड़ता था।
विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में इस बार जहां 58 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे और इतनी ही शोध उपाधियां भी दी जानी हैं। इसके अलावा शास्त्री, आचार्य समेत अन्य कक्षाओं की करीब 32 हजार उपाधियां भी वितरित की जाएंगी। पिछले साल सर्वाधिक पदक पाने वाले विद्यार्थी सुमन चंद्र पंत ने दीक्षांत समारोह में गाउन का विरोध करते हुए न केवल पदक लेेने से मना कर दिया था बल्कि इसकी शिकायत कुलाधिपति से भी की थी। इस बार इस तरह की स्थिति न उत्पन्न हो इसलिए राजभवन से आए एक पत्र में कुलपति से समारोह से पहले ही परिधान पर फैसला करने को कहा गया था, अब विश्वविद्यालय की ओर से परिधान तय किया जा चुका है। कुलसचिव वीके सिन्हा ने बताया कि इस बार छात्रों को घर से धोती-कुर्ता और छात्राओं को क्रीम कलर की साड़ी पहनकर विश्वविद्यालय आना है। विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें टोपी और उत्तरीय दी जाएगी। इसके लिए उन्हें 250 रुपये शुल्क जमा करना पड़ेगा। दीक्षांत समारोह की स्मृतियां संजोने के लिए के लिए विद्यार्थी टोपी, उत्तरीय घर ले जा सकेंगे।
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आज तक आपत्ति का मौका
वाराणसी। संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक पाने वालों की सूची चार दिसंबर को ही जारी की जा चुकी है। इस पर आपत्ति के लिए दस दिसंबर तक का समय निर्धारित है। इस दौरान दो आपत्तियां आई हैं, जिनका निस्तारण कराया जा रहा है। कुलसचिव वीके सिन्हा ने बताया कि दस दिसंबर तक आने वाली आपत्तियों के निस्तारण के बाद 11 दिसंबर को फाइनल सूची जारी की जाएगी।