27 मई को श्रीवत्स ने फिर फोन किया तो देवांश का मोबाइल फोन स्विच ऑफ बता रहा था। श्रीवत्स ने होटल के रिसेप्शन पर फोन किया तो पता लगा कि देवांश अपने कमरे में नहीं है। उसका लैपटॉप और बैग उसके कमरे में ही हैं। श्रीवत्स ने देवांश की परिचित बीएचयू की छात्रा अनुष्का को फोन किया। अनुष्का ने बताया कि देवांश से उसकी लड़ाई हुई थी, इसलिए वह उसके बारे में नहीं जानती। इसके बाद भी देवांश के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो वह और उनकी पत्नी 29 मई को वाराणसी आए और भेलूपुर थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
रामकिशोर यादव ने बताया कि वह पहले से अनुष्का के बारे में कुछ नहीं जानते थे। बेटे के दोस्तों से पता लगा कि देवांश और अनुष्का स्कूल के समय से ही एक-दूसरे से परिचित हैं। उनका बेटा पहले भी अनुष्का से मिलने बनारस आ चुका था। अपने बेटे की खोजबीन करते हुए उन्होंने कानपुर आउटर स्थित अनुष्का के घर का पता लगाया।
वह अनुष्का के घर पहुंचे तो उसके चाचा और पापा ने उससे मिलने नहीं दिया। दोनों लोगों ने गालीगलौज करते हुए कहा कि तुम्हारे बेटे को हम लोगों ने मरवा दिया है। चुपचाप यहां से भाग जाओ, नहीं तो तुम्हारा भी कहीं पता नहीं लगेगा। रामकिशोर ने बताया कि अनुष्का के पापा और चाचा की बातें सुन कर वह सन्न रह गए और उन्हें अहसास हो गया कि उनके बेटे के साथ कुछ गलत जरूर हुआ है।
सीसी कैमरों की फुटेज से पता लगा कि आखिरी बार उनका बेटा अस्सी क्षेत्र में ही देखा गया था। उधर, इस संबंध में अस्सी चौकी प्रभारी ने बताया कि जिस होटल में छात्र ठहरा था, वहां के स्टाफ से उसके बारे में पूछताछ की गई। छात्र के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालने के साथ ही उसकी तलाश की जा रही है। जल्द ही पुलिस की एक टीम मुकदमे में नामजद छात्रा और उसके पापा व चाचा से पूछताछ के लिए कानपुर भेजी जाएगी।
रामकिशोर यादव का आरोप है कि पुलिस तहरीर के आधार पर मुकदमा ही नहीं दर्ज कर रही थी। इस वजह से आरोपियों का मन बढ़ गया। वह लगातार धमका रहे थे। अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय एवं अपराध) के निर्देश पर मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बावजूद अस्सी चौकी और भेलूपुर थाने की पुलिस की ओर से उन्हें कोई खास नहीं मदद नहीं मिल सकी। वह अपनी पत्नी के साथ बनारस में जगह-जगह घूम कर अपने बेटे को खोज रहे हैं।