कलाकारों को दर्शकों ने सराहा
तबला संगति डॉ. अमित ईश्वर तथा सह प्रभाव वाद्य संगति धीरज कुमार की रही। तीसरा कार्यक्रम छपरा के वरिष्ठ कलाकार पं. रामप्रकाश मिश्रा के गायन का रहा। तबला संगति सुधाकर कश्यप तथा संवादिनी पर पं. पंकज शर्मा, गायन के साथ सारंगी पर आशीष मिश्रा ने संगत की। रामप्रकाश ने गायन का आरंभ राग मेघ मल्हार में विलंबित तीनताल में निबद्ध रचना घनन घनन घन घोर घोर... के उपरांत द्रुत एकताल में निबद्ध बंदिश कजरा कारे-कारे सुनाया।
समापन कजरी सांवरिया नहीं आए छाई घटा घनघोर...से हुआ। अंतिम प्रस्तुति प्रयागराज की उर्मिला शर्मा के कथक नृत्य की रही। दुर्गा वंदना के उपरांत श्री कृष्ण की स्तुति तथा कजरी रोको ना डगर मोरी श्याम... तथा कृष्ण का रास अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक सौरभ श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शोभित नाहर तथा डॉ. रत्नेश वर्मा ने दीप जलाकर किया। इस अवसर पर डॉ. राजेश्वर आचार्य तथा प्रो. राजेश शाह की उपस्थिति रही।