बीएचयू की डिप्टी चीफ प्रॉक्टर प्रो. श्रद्धा सिंह के सरकारी आवास पर पत्थर फेंके जाने की सूचना पर मंगलवार को लंका थाने के दरोगा, इंस्पेक्टर, एसपी सिटी और एडीएम सिटी जांच करने पहुंचे। प्रकरण को लेकर बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने बातचीत की। बुधवार को घटना से संबंधित समाचार ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित हुआ तो प्रो. श्रद्धा ने यूटर्न ले लिया।
पीआरओ के माध्यम से अपना स्पष्टीकरण विज्ञप्ति के माध्यम से भेजकर कहा कि यह समाचार निराधार और असत्य है। ऐसा विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करने के लिए किया गया है। प्रो. श्रद्धा ने ऐसा क्यों किया यह समझ से परे है और जब पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को इस बात का पता लगा तो वे भी हैरान दिखे।
लंका इंस्पेक्टर के सरकारी मोबाइल नंबर पर मंगलवार सुबह करीब साढ़े सात बजे चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने कॉल कर बताया कि सोमवार आधी रात बाद प्रो. श्रद्धा सिंह के आवास पर पत्थर फेंके गए। इस पर इंस्पेक्टर लंका ने एक दरोगा को मौके पर भेजा और थोड़ी देर बाद स्वयं पहुंचे। घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई और सूचना उच्चाधिकारियों को दी।
जांच में सामने आया कि प्रो. श्रद्धा की कार और गमले पर पत्थर फेंका गया था। डीएम के निर्देश पर दोपहर करीब 12 बजे एडीएम सिटी और एसपी सिटी प्रकरण की जांच करने पहुंचे। इस दौरान प्रो. श्रद्धा के आसपास के दो सरकारी आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ की गई तो एक ने कहा कि उसे कुछ नहीं पता है, जबकि दूसरे ने कहा कि कुछ लड़के बाइक से आए थे।
मगर, वह बाइक और लड़कों को नहीं पहचानता है। प्रकरण को लेकर प्रो. श्रद्धा ने पुलिस को बताया कि उन्होंने प्रॉक्टोरियल बोर्ड के कंट्रोल रूम को सूचना दी थी, लेकिन लंका थाने में तहरीर देने से इंकार कर दिया।
इसके बाद एडीएम सिटी और एसपी सिटी ने कुलपति से मुलाकात की और घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही, लंका इंस्पेक्टर को घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने की ताकीद करते हुए दोनों अधिकारी वापस लौट गए।